कानपुर के चर्चित संजीत अपहरण हत्याकांड को डेढ़ साल बीत चुके हैं लेकिन कई सवाल अनसुलझे हैं। जिसमें सबसे बड़ा सवाल है कि बदमाश जो बैग ले गए थे उसमें फिरौती की रकम थी या नहीं। फिरौती आज भी राज बनी हुई है। इसकी जांच एक वरिष्ठ आईपीएस को सौंपी गई थी लेकिन जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हुई। जांच में पुलिस का दावा सही पाया गया या पीड़ित परिजनों के आरोप सही थे। यह स्पष्ट नहीं हो सका है। हालांकि अब सीबीआई केस की एक-एक परतों की तफ्तीश कर रही है। उम्मीद है कि इसमें तथ्य स्पष्ट होंगे। 22 जून 2020 को संजीत का अपहरण हुआ था। पुलिस ने 24 जुलाई 2020 को खुलासा कर आरोपियों की गिरफ्तारी की थी।
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
इसके पहले बदमाशों के फिरौती मांगने पर पुलिस ने उनको पकड़ने का जाल बिछाया था। 13 जुलाई को बदमाशों के बताए गए स्थान गुजैनी फ्लाईओवर पर संजीत के परिजनों को लेकर पुलिस पहुंची थी।
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संजीत हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
तभी नीचे खड़े बदमाशों के कहने पर पुलिस ने संजीत के पिता से नीचे बैग फिकवा दिया था। बदमाश बैग लेकर फरार हो गए थे। पुलिस ताकती रह गई थी। इस घटनाक्रम के बाद परिजनों ने दावा किया था कि बैग में फिरौती के 30 लाख रुपये थे।
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
जबकि पुलिस का कहना था कि बैग में नकली नोट थे। शासन ने इसकी जांच वरिष्ठ आईपीएस बीपी जोगदंड को दी थी। जांच में क्या हुआ? कुछ भी पता नहीं चला। पीड़ित परिजन आज भी इंतजार कर रहे हैं कि इस मसले में आखिर क्या हुआ।
आईपीएस से हो सकती है पूछताछ
तत्कालीन एसपी साउथ आईपीएस अपर्णा गुप्ता से सीबीआई पूछताछ कर सकती है। क्योंकि विभागीय जांच में वह दोषी पाई गई हैं। ऐसे में सीबीआई उनके लिए मुश्किल कर सकती है। जल्द एक बार फिर सीबीआई टीम कानपुर आ सकती है। वहीं केस से संबंधित पुलिसकर्मियों व वादी आदि के बयान दर्ज कराने की भी प्रक्रिया शुरू होगी।