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अरबपति बिजनेसमैन के पतन की 'दिलचस्प कहानी' से जानें गलतियां कैसे करती हैं बर्बाद!

Fri, 07 Dec 2018 03:13 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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बैंक ऑफ इंडिया काे हजाराें कराेड़ रुपये की चपत लगाने वाले विक्रम काेठारी की कहानी बड़ी दिलचस्प है। देश-दुनिया में कोठारी परिवार की पहचान पान मसाले के ब्रांड पान पराग से बनी। मनसुख भाई कोठारी ने बेटों दीपक कोठारी और विक्रम कोठारी के साथ वर्ष-1975 में पुड़िया वाला पान मसाला बनाकर बेचना शुरू किया। छोटी पुड़िया में पान मसाला लोगों को बहुत पसंद आया। बॉल पेन्स (कलम) में सबसे मशहूर इंडियन कंपनी Rotomac Group के मालिक विक्रम कोठारी के बुरे दिन खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। बैंक ऑफ इंडिया ने कानपुर के उद्योगपति विक्रम कोठारी के तिलक नगर स्थित आवास (मकान संख्या 7/23) को अपने कब्जे में ले लिया है। कोठारी का बैंक पर करीब 900 करोड़ रुपये ऋण है।
 
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फेरी लगाकर पिता बेचते थे पान मसाला, होनहार बेटाें ने खड़ी कर दी कराेड़ाें की कंपनी, आज हो गई ये हालत
छोटी पुड़िया का मसाला देखते ही देखते पान पराग के साथ कानपुर पान मसाला कारोबार का केंद्र बन गया। यहां एक के बाद एक पान मसाला के ब्रांड खड़े हो गए। मनसुख भाई कोठारी नील वाली गली में किराये के घर में रहते थे। वह फेरी लगाकर नारियल तेल, बिस्कुट और बीड़ी बेचते थे। 70 के दशक में मनसुख भाई ने घर पर पान मसाला बनाकर बेचना शुरू किया।
 
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दोनों बेटों ने उनके फेरी के काम को पान मसाला इंडस्ट्री में बदल दिया। कोठारी परिवार कानपुर ही नहीं, देश और दुनिया में देश का पहला पान मसाला बनाने के लिए मशहूर हुआ। पान पराग फैक्ट्री का मालिकाना हक मनसुख भाई के पास था। 90 के दशक में विक्रम कोठारी ने पेन बनाने वाली फैक्ट्री रोटोमैक लगाई। यही फैक्ट्री दीपक और विक्रम के बीच विवाद की जड़ बनी।
 

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कोठारी बंधुओं के कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि विक्रम रोटोमैक का खर्च पान पराग कंपनी से निकालने लगे। इस पर दीपक ने भी यस ब्रांड से मिनरल वाटर की फैक्ट्री लगा ली। इसके बाद दोनों भाइयों के बीच वैचारिक मतभेद इतना बढ़ा कि मामला बंटवारे तक पहुंच गया। विक्रम ने पिता से पान पराग फैक्ट्री मांगी।
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पिता ने चल-अचल सभी संपत्तियों का समान रूप से बंटवारा करते हुए दीपक को पान पराग और विक्रम को रोटोमैक सौंप दी। इसके बाद विक्रम ने फॉरेन ट्रेड, रियल इस्टेट, फूड, सॉफ्टवेयर आदि व्यवसायों में हाथ आजमाया। रोटोमैक कंपनी की बाजार में अच्छी पकड़ बन गई।
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करीब 25 वर्ष तक अर्श में रहने वाले विक्रम के अगस्त-2016 में अचानक फर्श पर पहुंचने की जानकारी सामने आई। उनके दीवालिया होने की खबर सबसे पहले अमर उजाला ने प्रकाशित की थी। जानकारों की मानें तो गलत निवेश और फिजूलखर्ची उनके व्यावसायिक पतन का कारण बनी।
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