दोस्तों पिछले दिनों दशहरा के टाइम हम कानपूर आय रहेन अउर जइसा कि हम पिछली दफा बताये रहेन कि हम गए रहेन बर्रा आपन मामा के हिंया.. तो हुंवा हम आपन मामी से बतियावत रहेन.. तो हमरी मामी कहे लागीं बच्चा अब हमरी उमर हुई गे.. का जानि कब प्रभु जी बुलाय लें.. बस बच्चा सब ठीक ठाक निपटत रहे अउर का चाहि.. हम कहा अउर सुनाओ मामी.. तो कहे लागीं ए बच्चा ई रामलीला मंडली वाले जान आजिज किये हैं..
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राजू श्रीवास्तव
अब बताओ ई लोग हनुमान पार्क वाले चंद्रप्रकास के लरिका ओमप्रकास का फिर सीता बनाय दिहिन.. अरे सीता बनाय का है तो कौनो केर बिटिया का बनाय देते.. कोऊ सीता ना बनत रहा तो ओमप्रकास का बनाय दिहिन.. याक दाएँ ई ओमप्रकासवा मंदोदरी बना रहा.. नहीं तो हर साल सीता बनत हे.. ई सब एके घर मा केहू का पता नाहीं रहा.. तो अबकी जौने दिन सीता हरण रहा तो चंद्रप्रकास एके बाप गए रामलीला देखे.. ओका देख के कहे लाग कि ई सीता तो आपन ओमप्रकास लग रहा है.. तो उनका कोऊ बताईस कि ई तोहार लरिका ओमप्रकासै होय जौने सीता बने भये हैं..
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Raju Srivastav
अउर ई आज नाही बने हैं हर साल बनत हैं.. बाद मा ऊ घर आवा.. तो चंद्रप्रकास डंडा लई के जो उस से पूछिन हैं.. अये बच्चा हमसे ना पूछौ.. कहिन कि हम तुमका मेहेरिया बने खातिर पैदा किया रहा का.. औरत बने भये हौ.. बहुत खरी खोटी सुनाईन.. तब से उनका लौंडा घर से बाहर नाहीं निकरा.. सही बात आय बच्चा सीता बनौ कौनो बुरी बात नाही.. पर कबहूँ कुछ औरौ बनौ.. कभों लक्ष्मण बनौ, कभों हनुमान बनौ.. हम कहा मामी अबकी रामलीला कइसी भई रही.. तो बतावे लागीं एक दिना रामलीला होत रही अउर बिजली चली गयी.. जनरेटर चालु होय का नाम ना लै.. जानौ कचड़ा फंसी गवा रहै इंजन मा.. जब तक गैस बत्ती जलावें जलावें तब तक चोरी हुई गे..
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Raju Srivastav
रावण के तीन मुकुट गायब.. लक्ष्मण का धनुष अउर हनुमान जी कि गदा गायब हुई गयी.. वहीं ई नयापुरवा के कुंजीलाल का लरिका पकरा गा.. सब टारच मार के देखिन तो हनुमान जी केर गदा अउर रावण केर मुकुट गोदी पकडे रहा.. सब कहिन चोरी करत हौ.. तो कहे लाग कि चोरी नाही करत रहेन.. हम तो ई सब पकडे बइठे हन ताकि कौनो ई सब चुरा ना लेवे.. अईस बचि गवा नाही तो उई दिना ओकी खोपड़ी पे चौराहा बनाय के कुटाई होत.. अउर सुनौ.. रावण के जले से दुई दिना पहिले ई हनुमान पार्क वाले शिवबोधन का लरिका माचिस लीन्हे रावण के पुतला कि तरफ भागत रहा,, ए बच्चा ऊ एक दिन पहिले ही रावण का फूंके वाला रहा.. ऊ तो कहौ सब पंचे ओका पकर लिहिन..
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राजू श्रीवास्तव
अगर ई पकरी ना लीन्ह जाय तो ई रावण के मरे से पहिलेहे जला देत.. देखो बच्चा हमका परपंचई कि आदत नहीं है.. कहे वाली बात तो आय मगर तुम केहू से कहेव नाही.. हमका का करे का है.. अउर बच्चा एक दिन हम आटे का हलवा बनावा.. हम कहा चलो रामजी सीताजी का खवा आई.. तो हम हलवा पीछे पिंडाल मा भिजवाय दिहा.. बाद मा हम पिंडाल के पीछे गएन तो का देखत हन बच्चा.. ई रावण बइठा हमरा हलवा खाय रहा.. अहिरावण हलवा खाय रहा.. हम बहुत गरियावा संचालक का.. कि हम इत्ते जतन से हलवा बनावा. अउर तुम हिंया सब राक्षसन का खवाय रहे हौ.. अरे रामजी का खवाओ.. सीताजी का खवाओ..
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राजू श्रीवास्तव
राक्षसन का काहे खवाय रहे हौ.. अउर बच्चा ई रावण लीला मंचन से पहिले ठेके पे नसा किये पड़ा रहा.. सब पंचे उठाय के लाय ओका.. अब बताव होय वाली रहै लंका दहन अउर ई रावण नसे मा धुत्त का कहत है.. कि हम लंका नरेस आज नृत्य देखब.. नचनिया नचवाओ हमरे दरबार मा.. फिर रावण के दरबार में नाचे वाली नचनिया नाचे लगी.. ई नचनिया लोगन का नया पुल वाले शुकुल रेलबाज़ार से बुलवाइन रहे.. बच्चा ई शुकुल वही नचनिया लोगन के पीछे पीछे फिरत रहे.. हम जानित है ई सुरु के रसिया आंय.. ई शुकुल उई नचनिया से कहे कि कल हमरे घरे आयेव तुमका चांदी केर पायल देआब.. वहु पहुँच गयी दुपहरिया को.. शुक्लाईन गयी रही बाजार करे चालीस दूकान..
अउर बच्चा ई शुकुल जैसेहे ऊ नचनिया का चांदी केर पायल देत रहे वइसेहे शुक्लाइन वापस आय गयी.. फिर उई दुईनो मा बहुत धरपटक भई.. बताओ अईस लच्छन हैं इनके अउर बने हैं रामलीला कमिटी के अध्यक्ष.... अउर बच्चा ई संजय पार्क वाले शिवबोधन आंय जो बड़े संचालक बने फिरत है.. एक दिना इ मंच पे गए कौनो अलाउंसमेंट करे.. अउर ई जैसेहे माइक पकडिन.. कौनो नासपीटा ओमा करंट छोड़ दीन्हिस.. शिवबोधन माइक पकडे वहीं मंच पे हींहीं हींहीं हिनहिनाय लाग.. उनके मोआन्छन के सब रोंवा जरी गे.. नाक के बाल जरी गे.. दोस्तों मामी केर परपंचई सुनि के हमार हंसत हंसत बुरा हाल हुई गवा रहा.. लास्ट मा एक्कै बात कहे चाहित है.. कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ..काहे से हमरे घर में हमरी कोई सुनत नहीं है* ..।