राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर में कहा कि गीता महोत्सव का सार मैंने गृहण किया। सभी को गीता ज्ञान लेना चाहिए। नैतिकता की शिक्षा से मनुष्य को अच्छा मनुष्य बनाया जा सकता है। चरित्र का निर्माण संस्कारों से होता है। संस्कारों की शिक्षा बहुत जरूरी है।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
समाज के उत्थान के लिए हर व्यक्ति में संस्कार जरूरी है। सशक्त भारत का निर्माण करने के लिए सामाजिक, आर्थिक न्याय, समता और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य बहुत जरूरी हैं। संस्कारयुक्त शिक्षा देना हमारा धर्म है। स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण से शिकागो के लोगों का दिल जीत लिया था।
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स्वामी जी के हृदय से निकलते हुए शब्द विश्वप्रेम को बढ़ावा देते हैंं। वेस्टर्न कंट्रीज में लेडीज एंड जेंटलमैन कहा जाता है।
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जब हम इंसान दूसरे इंसान को कहेंगे भाई-बहन तो पत्नी के अतिरिक्त सभी हमारे भाई-बहन हैं, यह विचार मातृत्व शक्ति को बढ़ावा देते हैं। यही हमारी भारतीय संस्कृति की अवधारणा है।
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हर मनुष्य प्रत्येक क्षण द्वंदों का सामना करता रहता है। समय पीछे हो जाता है और द्वंद सामने आते हैं। राष्ट्रपति ने कहा-'कर्मण्येवाधिकारस्ते माफलेषुकदाचन' यानि हमें बस कर्म करते रहना चाहिए फल की चिंता बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।
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राष्ट्रपति ने कहा कि बेटियों पर बेटों की अपेक्षा बंदिशें ज्यादा होती हैं इसके बावजूद वह समाज में नित नए अायाम रच रही हैं। उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों से अाह्वान किया कि महिलाएं स्वस्थ्य रहेंगी तभी परिवार, समाज अौर राष्ट्र का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। इसलिए महिलाअों अौर वंचित वर्ग को स्वास्थ्य शिक्षा अौर सहूलियतें पहुंचाना अापके कंघों पर है।
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सीएसए पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संस्कार युक्त शिक्षा पर बोलते हुए कहा कि इंसान हर समय द्वंद से सामना करता है। इससे तभी छुटकारा मिल सकता है जब इंसान बगैर फल की इच्छा किए अपना कर्म करे।
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राष्ट्रपति ने कहा कि आज के परिपेक्ष्य में संस्कार युक्त शिक्षा की अनिवार्यता अधिक है। बोले, प्रत्येक इंसान में प्रतिभा होती है। फिर चाहे वह गरीब हो या अमीर। विकलांग हो या स्वस्थ्य।
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युवाओं को जरूरत इस बात की है कि वे अपनी प्रतिभा को निखारें। राष्ट्रपति ने कहा कि प्रतिभा के साथ-साथ संस्कार बहुत जरूरी हैं।
भारत ने पूरी दुनिया में प्रेम सौहार्द का संदेश दिया। महापुरुषों के जीवन का अध्ययन करने से बच्चों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में दुर्भाग्य से अभी भी कई लोग बेटियों का महत्व नहीं समझ रहे हैं। ये तब है जब केंद्र सरकार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे कई कार्यक्रम चला रही है। महिलाओं को भी अब पहले से ज्यादा सशक्त होने की जरूरत है। शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर चेतना और जागरूकता घर-घर तक पहुंचाने की जरूरत है।