वर्ष 2018 राजनीति के लिहाज से हुई उठा पटक के लिए भी याद रखा जाएगा। यूपी में हरदोई जिले के कद्दावर नेता नरेश अग्रवाल भाजपा में शामिल हुए। डॉक्टर अशोक बाजपेई की तीन दशक पुरानी सांसद बनने की हसरत भाजपा ने राज्यसभा भेजकर पूरी कर दी। जनपद के छह विकास खंडों में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी उपचुनाव में जीतकर ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पर काबिज हुए। कांग्रेस में चल रही जिलाध्यक्ष पद की खींचतान को लेकर कोई निर्णय नहीं हो पाया, तो सपा में भी जिला मुखिया को लेकर असमंजस है। बसपा ने जिलाध्यक्ष बदलकर अपना निर्णय स्पष्ट कर दिया।
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कार्यकर्ता बैठक में बोलते पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
कद्दावर नेता नरेश अग्रवाल इस वर्ष मार्च में समाजवादी पार्टी को अलविदा कहकर कुनबे के साथ भाजपा में शामिल हो गए। उनके पुत्र सदर विधायक नितिन अग्रवाल, जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, नगर पालिकाध्यक्ष सुख सागर मिश्र मधुर, बिलग्राम नगर पालिका के अध्यक्ष मोहम्मद हबीब, सांडी नगर पालिका अध्यक्ष के प्रतिनिधि दिनेश गुप्ता, सुरसा के ब्लाक प्रमुख महिपाल सिंह दिल्ली में भाजपाई हुए तो जिले भर के उनके समर्थक भी भाजपा की जयकार करने लगे।
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भाजपा सांसद अशोक बाजपेई
लगभग चार दशक तक समाजवादी राजनीति करने वाले पूर्व मंत्री डॉक्टर अशोक बाजपेई यूं तो वर्ष 2017 में ही भाजपाई हो गए थे, लेकिन उनकी तीन दशक पुरानी सांसद बनने की हसरत भाजपा ने वर्ष 2018 में पूरी कर दी। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया और जिताकर राज्यसभा भेज दिया।
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बात अगर चार अहम राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों को लेकर हो, तो भी यह वर्ष याद रखा जाएगा। सत्ताधारी भाजपा ने जिलाध्यक्ष रहे श्रीकृष्ण शास्त्री को लेकर कार्यकर्ताओं में लगातार बढ़ रहे रोष को देखते हुए सौरभ मिश्रा को 1 नवंबर की रात भाजपा का नया जिलाध्यक्ष बना दिया। पद से हटाए गए श्रीकृष्ण शास्त्री का फिलहाल समायोजन नहीं हो पाया है।
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नरेश अग्रवाल के भाजपा में शामिल होने के बाद अखिलेश यादव ने सपा की जिला कार्यकारिणी भंग कर दी। अभी तक जिलाध्यक्ष की घोषणा नहीं हो पाई। कांग्रेस में भी जिलाध्यक्ष को लेकर उठा-पटक है। डॉक्टर राजीव सिंह लोध जिलाध्यक्ष होने का दावा करते हैं, तो आशीष कुमार सिंह कार्यवाहक अध्यक्ष होने की बात मजबूती से कहते हैं। बसपा ने रुख साफ कर मेडू निवासी कैडर के कार्यकर्ता मेवाराम वर्मा को जिलाध्यक्ष बना दिया।
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जनपद के छह विकास खंडों में इसी वर्ष ब्लाक प्रमुख पद के लिए उपचुनाव हुआ। नरेश अग्रवाल के गढ़ बावन में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में समीर सिंह को निर्विरोध ब्लाक प्रमुख चुना गया। इसी तरह टोडरपुर में रामबाबू त्रिवेदी, टड़ियावां में ऊदन, बिलग्राम में पृथ्वीराज सिंह, पिहानी में स्वर्णलता सिंह, अहिरोरी में शिवरतन लाल को ब्लाक प्रमुख चुना गया। माधौगंज में ब्लाक प्रमुख रहीं कंचनलता ने अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले ही इस्तीफा दे दिया। फिलहाल पद रिक्त है और तीन सदस्यीय समिति के माध्यम से कार्य हो रहा है।
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राजनीतिक दृष्टि से नया साल यानी 2019 बेहद महत्वपूर्ण है। लोकसभा के चुनाव होंगे। एक ओर जहां भाजपा और बसपा के नवनियुक्त जिलाध्यक्षों को अपना रणनीतिक कौशल दिखाना होगा, वहीं दूसरी ओर भाजपा में शामिल हुए नरेश अग्रवाल और सांसद बने अशोक वाजपेई के सामने भी जिले की दोनों सीटें भाजपा को जिताने की बड़ी चुनौती होगी।
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वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव होंगे। सदर की सीट के साथ ही मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से भी गत चुनाव में भाजपा प्रत्याशी जीते थे। सदर से अंशुल वर्मा और मिश्रिख से अंजू बाला सांसद हैं। लोकसभा चुनाव में अभी प्रत्याशियों की घोषणा नहीं हुई है। लिहाजा टिकट के दावेदार जोर आजमाइश कर रहे हैं। दोनों सांसदों के सामने अपना टिकट और फिर अपनी सीट बचाने की बड़ी चुनौती है।
लंबे समय बाद जनपद में समाजवादी पार्टी अपने पुराने चेहरों नरेश अग्रवाल और अशोक वाजपेई के बिना लोकसभा चुनाव में उतरेगी। सपा-बसपा के बीच गठबंधन की स्थिति होने पर भी सदर सीट से सपा प्रत्याशी का ही चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। तीन बार इस सीट से सांसद रह चुकीं ऊषा वर्मा सबसे मजबूत दावेदार हैं और वह पांच साल का राजनीतिक वनवास खत्म करने की कवायद करेंगी। मिश्रिख में प्रत्याशी जो भी हो, लेकिन इन दोनों नेताओं का रुख अहम भूमिका निभाएगा।