बिकरू कांड के आरोपी जय और उसके करीबियों का नाम मादक पदार्थों की तस्करी में भी सामने आया है। एसआईटी जांच में यह तथ्य भी शामिल था। पुलिस के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर एसटीएफ कानपुर यूनिट ने जांच शुरू की है। आशंका है कि जय और उसके करीबी कई वर्षों से मादक पदार्थों की तस्करी में सीधे तौर पर शामिल रहे हैं। बड़े तस्करों और अपराधियों का साथ देने के साथ इन्हें पुलिस का संरक्षण दिलाया।
विज्ञापन
2 of 5
जय बाजपेई एवं पत्नी श्वेता
- फोटो : amar ujala
तीन साल पहले तत्कालीन एएसपी कन्नौज और ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया था कि जय मादक पदार्थों की तस्करी में भी शामिल है। बड़ी डील करता है लेकिन कभी इसकी जांच नहीं हुई। बिकरू कांड के बाद इस संबंध में कई शिकायतें पुलिस के पास पहुंची और पुरानी जांच रिपोर्ट का अवलोकन किया गया। इसके आधार पर मादक पदार्थ की तस्करी के जाल का पर्दाफाश करने के लिए कानपुर एसटीएफ यूनिट को लगाया गया है।
विज्ञापन
3 of 5
विकास दुबे का खजांची जय
- फोटो : अमर उजाला
जय पर दर्ज केस से धाराएं हटाईं, पुलिस का खेल
एसआईटी की सिफारिश पर नजीराबाद थाने में जय के खिलाफ पासपोर्ट लेने में फर्जी शपथ पत्र देने के मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसमें धोखाधड़ी (420) और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धारा (467,468) लगाई गई थी। पुलिस अभी तक इसमें बयान दर्ज नहीं कर सकी है। कोर्ट ने 19 तारीख को जय को तलब किया है। इधर पुलिस ने विवेचना के दौरान खेल कर दिया।
4 of 5
जय बाजपेई आईपीएस अनंत देव के साथ
- फोटो : अमर उजाला
कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धाराओं को हटा दिया है। इंस्पेक्टर ज्ञान सिंह का कहना है कि शपथ पत्र कचहरी से बनवाया गया था, वो जांच में सही पाया गया। जय ने जो जानकारी दी थी, वह फर्जी थी। उसमें आपराधिक इतिहास छिपाया गया था। उसने फर्जी दस्तावेज नहीं बनवाए। इसलिए केवल धोखाधड़ी की धारा में विवेचना की जा रही है।
जांच में फंसे पुलिसकर्मियों ने विकास से सांठगांठ से किया इंकार
23 पुलिसकर्मियों की प्रारंभिक जांच एसपी पूर्वी कर रहे हैं। एसपी पूर्वी ने सभी को बयान के लिए नोटिस भेजा था। एक दर्जन पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज हो चुके हैं। सभी पुलिसकर्मियों ने बयान में विकास से सांठगांठ की बात से इंकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया है। शस्त्र लाइसेंस की फाइल कैसे क्लियर हुईं, इस पर भी जवाब नहीं दे सके।