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पिंटू सेंगर हत्याकांड: हिस्ट्रीशीटर पप्पू स्मार्ट और उसके भाइयों की शस्त्र लाइसेंस फाइलें भी गायब, अधर में अटकी जांच

Tue, 09 Feb 2021 12:39 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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पिंटू सेंगर हत्याकांड - फोटो : amar ujala
हिस्ट्रीशीटर पप्पू स्मार्ट और उसके भाइयों के शस्त्र लाइसेंस की पत्रावलियां भी कलेक्ट्रेट से गायब हैं। ये खुलासा 2018 में हुआ था जब तत्कालीन डीएम ने कार्रवाई के निर्देशित किया था तो फाइलें ही नहीं मिली थीं। इसके पीछे पप्पू स्मार्ट की पुलिस व प्रशासन के अफसरों के बीच साठगांठ बताई जा रही है। एसआईटी की जांच में भी पत्रावलियां गायब होने की पुष्टि हुई है।
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बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
पप्पू स्मार्ट के पास एक डबल बैरल व एक रिवाल्वर, उसके भाई तौसीफ व आमिर के पास एक-एक लाइसेंसी रिवॉल्वर थी। अधिवक्ता संदीप शुक्ला ने इस मामले की शिकायत 2015 में सीएम कार्यालय में की थी जिसमें कहा था कि ये तीनों भाई शातिर अपराधी हैं। केस भी दर्ज हैं, इसके बावजूद ये लाइसेंसी असलहा रखे हुए हैं।

 
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बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
जांच के बाद तीनों भाइयों के चारों शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए गए थे। डीएम ने एफआईआर दर्ज करवाकर इनके खिलाफ कार्रवाई की जब संस्तुति की तो पता चला था कि चारों लाइसेंस की पत्रावलियां ही नहीं मिल रही हैं। अधिवक्ता संदीप ने बताया कि पत्रावलियां न मिलने की वजह से आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। वे इस मामले में डीएम को प्रार्थना पत्र देंगे। 

 

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पिंटू सेंगर हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
क्या अफसर थे मेहरबान  
अधिवक्ता ने बताया कि शासन से शिकायत के बाद तत्कालीन आईजी आलोक सिंह ने पप्पू स्मार्ट और उसके गिरोह पर रासुका लगाने के निर्देश दिए थे। उस वक्त भी पप्पू पर गंभीर मामले दर्ज थे। उसकी संपत्ति भी जब्त की गई थी। आईजी ने एसएसपी को मामले की रिपोर्ट भेज दी थी लेकिन वो फाइल आगे नहीं बढ़ी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पप्पू स्मार्ट पर अफसर मेहरबान रहे। अब भी रासुका उस पर नहीं, बल्कि पिंटू सेंगर की हत्या करने वाले दो शूटरों पर ही लगाने की प्रक्रिया चल रही है। 

 
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पिंटू सेंगर हत्याकांड - फोटो : amar ujala
अधर में अटकी जांच 
पिंटू सेंगर हत्याकांड में आरोपियों के नाम केस से बाहर करने के मामले की जांच एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार को सौंपी गई थी। पांच महीने से अधिक का समय हो चुका है जांच का कुछ पता नहीं है। अभी तक केवल एक ही विवेचक रवि कुमार श्रीवास्तव ने अपने बयान दर्ज कराए हैं।
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