कानपुर देहात के बेहमई कांड में अब 12 फरवरी को सुनवाई होगी। एसपी ने मूल केस डायरी ढूंढने के लिए 10 दिन का समय मांगा है। 14 फरवरी 1981 को डकैत फूलन देवी और उसके गिरोह ने बेहमई गांव में धावा बोलकर 20 लोगों की हत्या कर दी थी।
जंटर सिंह, वकील सिंह, देव प्रयाग, कृष्ण स्वरूप, गुरुमुख सिंह और रघुवीर सिंह गोली लगने से घायल हुए थे। बेहमई गांव निवासी राजाराम सिंह ने दस्यु सुंदरी फूलन देवी समेत 35-36 डकैतों के खिलाफ थाना सिकंदरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
वर्ष 2012 में डकैत फूलन, भीखा, पोसा, विश्वनाथ, श्याम बाबू और राम सिंह पर आरोप तय किए गए थे। मामले की सुनवाई सुधीर कुमार विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र (एंटी डकैती) की कोर्ट में चल रही है।
18 जनवरी को फैसले की तारीख तय की गई थी। पत्रावली में मूल केस डायरी न होने पर फैसला नहीं सुनाया गया था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान एसपी की ओर से केस डायरी ढूंढने के लिए 10 दिन का समय मांगा गया। जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई की तिथि 12 फरवरी तय की है।
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फूलन देवी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
14 फरवरी 1981 को फूलन ने अपने 35 साथियों के साथ बेहमई के 26 लोगों पर 5 मिनट में सैकड़ों गोलियां बरसाईं थीं। इनमें से 20 की मौत हो गई थी। फूलन ही मुख्य आरोपी थी, लेकिन मौत के बाद उनका नाम हटा दिया गया। इसके बाद 5 आरोपियों श्याम बाबू, भीखा, विश्वनाथ, पोशा और राम सिंह पर केस चलाया गया। इसमें से राम सिंह की 13 फरवरी 2019 को जेल में मौत हो गई। पोशा जेल में है। जबकि तीन आरोपी जमानत पर हैं।
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फूलन देवी
- फोटो : अमर उजाला
लगातार दूसरी बार टला फैसला
छह जनवरी को इस केस में कोर्ट फैसला सुनाने वाली थी, लेकिन बचाव पक्ष के वकील ने सुप्रीम कोर्ट की कुछ नजीरें व लिखित रूलिंग दाखिल करने की बात कहते हुए फैसले की तारीख टालने का अनुरोध किया था। जिस पर कोर्ट ने फैसले के लिए 18 जनवरी की तारीख तय की। उस दिन सुनवाई शुरू हुई तो वादी ठाकुर राजाराम सिंह ने कहा, ''मेरे बयान हुए, घायलों के बयान दर्ज हुए थे, मुकदमा चलता रहा तो केस डायरी गुम कैसे हो गई।''
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फूलन देवी एवं मां मूला देवी
- फोटो : अमर उजाला
गवाह जेंटर सिंह ने कहा कि मूल केस डायरी पहले से नहीं थी। केस से जुड़े कई दस्तावेज गुम हैं। विरोधी वकील फाइलों से कागज ले जाते रहे। वे जानबूझ कर फैसले में देरी करा रहे हैं। बचाव पक्ष के वकील गिरीश नारायण दुबे ने कहा कि 2012 और 2013 में केस डायरी की नकल और अन्य दस्तावेज मांगे थे, जो आज तक नहीं दिए गए।
फूलन ने 1983 में आत्मसमर्पण किया था, 2001 में हुई थी हत्या
बेहमई हत्याकांड की मुख्य आरोपी फूलन देवी थी। उसने 1983 में मध्य प्रदेश में आत्मसमर्पण किया था। 1993 में फूलन जेल से बाहर आई। इसके बाद मिर्जापुर लोकसभा सीट से दो बार सपा के टिकट पर सांसद बनी। 2001 में शेर सिंह राणा ने फूलन की दिल्ली में हत्या कर दी थी। इसके बाद फूलन का नाम केस से हटा दिया गया।