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लापरवाही: कार्डियोलॉजी और हैलट के बीच भटकते हुए गई जान, बेटी रोते हुए बोली भर्ती कर लेते तो मां जिंदा होती

Tue, 01 Jun 2021 10:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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हैलट में मां के साथ बेटी - फोटो : amar ujala
कानपुर में मंगलवार को काॅर्डियोलॉजी और हैलट के बीच भटकते हुए एक मरीज की जान चली गई। गुस्साए परिजनों ने काॅर्डियोलॉजी में भर्ती न करने की वजह से जान जाने का आरोप लगाया है। बता दें कि ये हालात तब हैं जब कुछ दिन पहले कानपुर दौरे पर आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरबी कमल को स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को लेकर फटकार लगाई थी। इन सबके वाबजूद डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मरीजों की जान जाने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को रामादेवी के संजीव नगर की रहने वाली शिवदेवी के सीने में तेज दर्द उठा। बेटी सोनाक्षी ने बताया कि नजदीक के एक डॉक्टर के पास ले गए, उन्होंने दिल का दौरा बताकर जल्द से जल्द कार्डियोलॉजी ले जाने को बोला। मां की तबीयत बिगड़ती जा रही थी।

 
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गंभीर हालत में बेटा लेकर पहुंचा था हैलट - फोटो : amar ujala
पिता गंगाराम और भाई सनी के साथ ई रिक्शे से मां को लेकर कार्डियोलॉजी पहुंचे। डॉक्टरों ने हालत गंभीर होने की वजह से भर्ती करने से मना किया और हैलट ले जाने को बोला। मेरी मां की सांसे चल रही थी।
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काॅर्डियोलॉजी में नहीं किया भर्ती - फोटो : amar ujala
हैलट इमरजेंसी पहुंचते ही तुरंत अंदर ले गए डॉक्टर ने जांच करने के बाद मृत घोषित कर दिया। इनका कहना है कि अगर कॉर्डियोलॉजी में मां को भर्ती कर लिया जाता तो शायद मां जिंदा होती।

 

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मां के पास खड़ी बेटी - फोटो : amar ujala
चोटिल को टरकाया, ईएमओ के दखल पर मिला इलाज
चकेरी के मतैया गांव निवासी पंकज दिवाकर की सोमवार देर रात मोहल्ले के कुछ लड़कों से विवाद हो गया, जिसमें पंकज को आंतरिक चोटें आ गई। मंगलवार को भाई नीरज और मां कुसुमा इलाज के लिए हैलट इमरजेंसी लेकर आए तो जूनियर डॉक्टरों ने टरका दिया। इसी बीच ईएमओ डॉ. आशीष श्रीवास्तव की नजर पीड़ित पर पड़ी, पूरा मामला जानने के बाद उन्होंने भर्ती कराया। तब जाकर इलाज शुरु हुआ। 
 
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हैलट के बाहर एंबुलेंस में मरीज - फोटो : amar ujala
डेढ़ दिन में दो लाख लिए, बिल भी नहीं दिया
उन्नाव जिले के भगवंतनगर के रहने वाली ज्योति को गालब्लेडर मे दर्द की शिकायत थी। पति जितेंद्र ने बताया कि इलाज के लिए 30 मई को ब्रह्म नगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। डेढ़ दिन के भीतर अपने स्वयं के मेडिकल स्टोर से महंगी कीमत के इंजेक्शन देकर दो लाख का बिल बना दिया। मंगलवार को जब बिल मांगा तो इलाज से मना कर दिया। हैलट में इनका उपचार शुरु किया गया।
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