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वंदे भारत के कोच बनाने वाली फैक्ट्री में तेज धमाके के साथ फटा ऑक्सीजन सिलिंडर तो उड़ गए चिथड़े

Wed, 14 Aug 2019 03:16 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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धमाके के बाद मच गया हड़कंप एक की मौत - फोटो : अमर उजाला
कानपुर के पनकी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित ट्रेन, मेट्रो ट्रेन और टी-18 की चेचिस बनाने वाली फैक्ट्री में मंगलवार सुबह ऑक्सीजन सिलिंडर तेज धमाके के साथ फट गया। चपेट में आए एक कर्मचारी के चिथड़े उड़ गए, वहीं अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए।

 
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इन्हीं में से फटा था सिलिंडर - फोटो : अमर उजाला
धमाका इतनी तेज था कि घटनास्थल के पास खड़ी करीब नौ इंची दीवार भी ढह गई। फैक्ट्री की खिड़कियों में लगे सभी शीशे टूटकर बिखर गए। पुलिस ने घायलों को दबौली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। तीनों की हालत गंभीर बनी हुई है। 

 
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यहां बनते हैं मेट्रो ट्रेन, ट्रेन और वंदे भारत के चेसिस - फोटो : अमर उजाला
स्वरूपनगर निवासी रवींद्र नाथ त्रिपाठी की पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में गैस प्लांट के पास वेद सासो मैकेनिका इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से फैक्ट्री है। यहां पर ट्रेन की चेचिस तैयार होती है। मंगलवार सुबह करीब छह बजे गणेश शंकर विद्यार्थी नगर पनकी निवासी सर्वेश पाल (28) काम करने फैक्ट्री पहुंचा।

 

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धमाके के बाद सिलिंडर का टुकड़ा दिखाता पुलिस कर्मी - फोटो : अमर उजाला
वह ऑक्सीजन सिलिंडर में रेगुलेटर फिट कर रहा था। तभी सिलिंडर फट गया। इससे सर्वेश की मौत हो गई। चार कर्मचारी बनपुरवा निवासी कुलदीप, सचेंडी धरमंगदपुर निवासी छोटे, बर्रा-8 निवासी दीपक और कर्रही निवासी सुरेश घायल हो गए। सर्वेश पाल मूलरूप से जुगराजपुर शिवली (कानपुर देहात) का रहने वाला था। 

 
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युवक की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला
फैक्ट्री में हादसे के वक्त तीस से अधिक कर्मचारी काम कर रहे थे। धमाका होते ही फैक्ट्री में भगदड़ मच गई। शुुरुआत में तो कर्मचारी समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर हुआ क्या। शव की हालत देखकर कर्मचारियों के रौंगटे खड़े हो गए। हादसे से हर कोई दहशत में था। धमाके की गूंज एक किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। 

 
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धमाका इतना तेज था कि कई सौ मीटर दूर तक उड़े चीथड़े - फोटो : अमर उजाला
लोहे की बड़ी-बड़ी चादरें काटने के लिए एलपीजी व ऑक्सीजन को एक सिलिंडर में मिक्स करके इस्तेमाल किया जाता है। फैक्ट्री में हर वक्त 40-50 सिलिंडरों का ढेर रहता है। हादसे के समय भी दर्जनों सिलिंडर रखे थे। धमाका होने से कई सिलिंडर 20-30 मीटर दूर जाकर गिरे। इससे ये सिलिंडर चपेट में आने से बच गए। अन्यथा हादसा और बड़ा हो सकता था। 
 
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