बच्चों में तकनीकी विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी खड़गपुर के छात्रों द्वारा बनाई गई संस्था रैकेथॉन ने कानपुर शहर के कई स्कूली बच्चों को तकनीकी के क्षेत्र में दक्ष बनाया है। जिसका प्रमाण शनिवार को प्रेस क्लब में देखने को मिला।
डीपीएस आजाद नगर के कक्षा चार से आठ तक के बच्चों ने मौजूदा परिवेश की जरूरत के मद्देनजर एक से बढ़कर एक मॉडल बनाए। ये मॉडल भले ही खिलौने जैसे लग रहे हों पर उनकी तकनीक भविष्य के बाजारों की तस्वीर दिखा रही थी।
स्मार्ट डस्टबिन
जो लोग कूड़ा फेंकने में आलस करते हैं उनके लिए स्मार्ट डस्टबिन बड़े काम की चीज है। यह मोबाइल ऐप के माध्यम से संचालित होता है। डस्टबिन में पहिये लगे हैं, आप फोन के जरिए डस्टबिन को पास बुला लेंगे और कूड़ा पास ले जाते ही उसका ढक्कन खुल जाएगा। स्मार्ट डस्टबिन को कक्षा आठ के प्रथम सहाय, यश कनौजिया, कक्षा छह के अभय सोनी, उज्जवल वर्मा, सूर्यांश यादव, सूर्यांश मिश्रा ने बनाया है।
आईआईटी कानपुर
स्मार्ट पार्किंग
आने वाले समय में स्मार्ट पार्किंग के गेटों पर सेंसर होंगे, जो अंदर गाड़ी खड़ी करने की जगह होने पर ही खुलेंगे। जैसे ही पार्किंग में जगह बनेगी गेट खुल जाएंगे। इसे कक्षा पांच की प्रियांशी, अक्षित, वेदांश और कक्षा आठ के सार्थक ने बनाया है।
फायर फाइटर
घर में कहीं भी आग लगने पर वह सेंसर के माध्यम से वहां पहुंचेगा और पानी या कार्बन डाई ऑक्साइड के माध्यम से आग को बुझा देगा। इसे कक्षा नौ के देव जायसवाल, कक्षा आठ के कान्हा शुक्ला, युवराज सिंह, कनिका मिश्रा, अर्नब गुप्ता ने बनाया है।
ब्लाइंड स्टिक
आने वाले समय में यह तकनीक बड़ी काम की होगी। इस स्टिक के सामने कोई रोड़ा या किसी के आने पर बीप की आवाज आएगी। इससे अंध व्यक्ति सतर्क हो सकेगा। इसे कक्षा चार के लवन्या गुप्ता, तनेश मोटानी और सूर्यवर्धन द्विवेदी ने बनाया है। इन बच्चों को रैकेथॉन के प्रोजेक्ट इंजीनियर धीर सिंह, मैनेजिंग हेड सुरेश सिंह, हॉवर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े इंजीनियर श्रीधामा और सीईओ अभिषेक सिंह ने तैयार किया है। धीर सिंह ने बताया कि इनका मकसद है कि जब बच्चे इंटर के बाद इंजीनियरिंग करने जाएं तो तकनीकी हौव्वा न लगे। बल्कि वह उसे आसानी से पढ़ सकें।