एक तरफ कुरान की आयतें तो दूसरी ओर मंत्रों की गूंज। एक तरफ ‘कुबूल है’ के लफ्ज तो दूसरी ओर ‘बहारों फूल बरसाओ’ गीत। दूल्हे नौशाद की अगवानी सुरेश तो सुनील की अगवानी करते रहमान। मौका था कानपुर में पांच हिन्दू और पांच मुस्लिम बेटियों की एक मंच पर शादी का। इस सामूहिक विवाह समारोह ने शहरवासियों को कनपुरिया गंगा-जमुनी तहजीब की तस्वीर दिखा दी।
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कानपुर में निकाह और विवाह
- फोटो : संजय लोचन पांडेय
बृहस्पतिवार को कानपुर के रावतपुर गांव में हुए इस विवाह समारोह में मेजबान बने क्षेत्र के आठ से 10 हजार लोग। बता दें कि रावतपुर गांव के आस-पास का इलाका सालों से सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील है। कई बार दो समुदाय आमने-सामने आ चुके हैं। ऐसे में यह पहल पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गई।
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विवाह और निकाह समारोह के आयोजक झक्की बाबू
- फोटो : संजय लोचन पांडेय
समाजसेवी मो. शफीक उर्फ बाबू झक्की की इस पहल को पूरे रावतपुर गांव के लोगों का सहयोग मिला। क्षेत्रीय लोगों ने अपनी बेटियों की शादी की तरह इस विवाह समारोह का आयोजन किया। यहां न तो कोई हिंदू था और न मुस्लिम, सब इंसान थे। एक जुटकर होकर शादी के इंतजाम में लगे थे। समारोह के लिए स्वेच्छा से पूरी रावतपुर गांव मार्केट बंद कर दी गई थी।
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कानपुर में निकाह और विवाह
एक ही मंच पर पांच हिंदू लड़कियों ने हिंदू रीति रिवाज से सात फेरे लिए वहीं पांच मुस्लिम कन्याओं का निकाह पढ़ा गया। बाबा सिद्धनाथ मंदिर के परिसर में हिंदू लड़कियों की शादी रामजानकी मंदिर के महंत आलोक दुबे ने मंत्रोच्चारण करके कराई, वहीं झक्की बाबू के घर पर पेश इमाम जीयाऊर रहमान व बड़ी ईदगाह के मौलाना असगर अली ने मुस्लिम लड़कियों का निकाह कराया।
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कानपुर में निकाह और विवाह
कोई चंदा नहीं, सबको न्योता
झक्की बाबू ने बताया कि पर्चे छपवाकर इच्छुक अभिभावकों को समारोह में शादी करने का न्योता दिया गया था। जब सबने शादी के लिए हामी भर तो इसके पूरा कराने की जिम्मेदारी मैंने ले ली। इन बेटियों को शादी का पूरा सामान भी दिया जा रहा है। किसी से कोई चंदा नहीं लिया गया। वह पहले से विधवा महिलाओं की मदद करते थे। दो बार हज पर गए और तीसरी बार तभी जाएंगे जब 20 बेटियों का विवाह कर लेंगे।
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कानपुर में निकाह और विवाह
आयोजक झक्की बाबू ने कहा कि अभी 10 बेटियों का विवाह और कराना बाकी है। यह शादी हिंदू-मुस्लिम के नाम पर इंसानों को बांटने वालों के लिए सबक है। सिर्फ चंद लोगों के कारण ही इंसान हिंदू-मुसलमान हो जाता है। मैं चाहता हूं इससे सबक लेते हुए पूरे देश में ऐसे आयोजन किए जाएं।
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कानपुर में निकाह और विवाह
विवाह समारोह में उद्यमी माहिम सलूजा, एडवोकेट कैफ मोहम्मद खान, रफत अली, ऋषभ जैन, चंदन भदौरिया, गोविंद रेडीमेड के गोविंद तिवारी, बाल कृष्ण कुशवाहा, आलोक पाण्डेय, बाबू पाण्डेय ने विशेष सहयोग किया। आल इंडिया मुस्लिम आर्गनाइजर के अध्यक्ष कुमैल अंसारी व उरोज अहमद ने स्वागत किया। जफर उल्ला खां, मोहम्मद तौहीद, विष्णु पासवान, डा. निसार अहमद, रामजी शर्मा, संतोष गुप्ता, शिव शंकर मिश्रा, अन्नू आदि रहे।