नोटबंदी के तत्काल बाद और बीच-बीच में पैदा हुई नकदी की किल्लत को दूर करने में रिजर्व बैंक काफी हद तक सफल रहा है। विभिन्न बैंकों से जुटाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि दो साल में रिजर्व बैंक के कानपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने अपने अधीन यूपी और उत्तराखंड के क्षेत्रों में करीब एक लाख 25 हजार करोड़ रुपये के नोट विभिन्न बैंकों को जारी किए। इसमें से 80 फीसदी नोट चलन में है, जबकि 20 फीसदी का गैप डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए भरा है।
नोटबंदी के तत्काल बाद मुद्रा की कमी को पूरा करने के लिए जारी किए गए दो हजार के नोटों ने फुटकर की समस्या पैदा की। बाद में यही नोट जमाखोरी का कारण बने। रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि इस समस्या का हल निकालने के लिए यूपी और उत्तराखंड में अब तक करीब 55 हजार करोड़ रुपये पांच सौ के नोटों के रूप में जारी किए जा चुके हैं। बीते चार माह से बैंकों और एटीएम बूथों में 500 रुपये के नोट अधिक पहुंचाए गए। इससे फुटकर और करेंसी की किल्लत की समस्या खत्म हुई।
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200 के नोट का सर्कुलेशन नहीं बढ़ा
नोटबंदी के बाद लोगों को पहली बार 200 रुपये के नोट देखने को मिले। आरबीआई कानपुर की ओर से यूपी और उत्तराखंड के जिलों में अब तक करीब 1000 करोड़ रुपये के दो सौ के नोट जारी किए जा चुके हैं। लोगों ने इसे हाथों हाथ तो लिया लेकिन चलन में लाने के बजाय घर पर ही रख लिया। बैंकों से जुड़े जानकार बताते हैं कि 200 के नोटों का सर्कुलेशन बढे़ तो फुटकर की समस्या खत्म होगी।
20 का नोट छोड़ हर करंसी बदली
नोटबंदी से पहले हजार और पांच सौ के असली और नकली नोट में भेद कर पाना बड़ा मुश्किल होता था। नोटबंदी के बाद से हजार और पांच सौ के नोट चलन से बाहर हुए। सिर्फ कानपुर में ही करीब 80 करोड़ रुपये के पांच सौ और हजार के नकली नोट पकड़े गए थे। भविष्य में नकली नोट आसानी से तैयार न हो पाएं इसलिए रिजर्व बैंक ने सभी नोटों की डिजाइन बदल डाली है। 20 का नोट छोड़कर 10, 50, 100 रुपये की नई करंसी चलन में आ गई है।
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आरबीआई कानपुर से जारी करंसी
करंसी कुल जारी
2000 के नोट 52,000 करोड़ रुपये
500 के नोट 55,000 करोड़ रुपये
100 के नोट 7000 करोड़ रुपये
50, 20, 10 के नोट 2500 करोड़ रुपये
200 के नोट 1000 करोड़ रुपये