पहाड़ से लेकर रेतीले तूफानों के बीच -3 डिग्री से 52 डिग्री सेल्सियस से अधिक तक के तापमान से जूझते हुए भी सटीक निशाना मारने में सक्षम धनुष तोप अब जल्द ही सेना को मिल जाएगी। ‘स्वदेशी बोफोर्स’ कही जा रही धनुष तोप देश की पहली 155 गुणा 45 कैलिबर की तोप है, जिसके बड़े पैमाने पर निर्माण को सेना और रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को हरी झंडी दिखा दी। आयुध निर्माणी कानपुर (ओएफसी) और फील्ड गन फैक्ट्री में 114 धनुष तोप बनाकर 2022-23 तक सेना को सौंप दी जाएगी। पहले चरण में 18 तोप दी जाएंगी।
बता दें कि स्वीडन में बनी बोफोर्स तोप ने कारगिल युद्ध के दौरान ऊंचे पहाड़ों पर बैठे दुश्मनों को मार भगाने में मदद की थी। धनुष की तकनीक इसी तोप जैसी है। तकरीबन 95 फीसदी स्वदेशी कलपुर्जों वाली धनुष तोप का परीक्षण सेना की ओर से हर मौसम के अनुसार किया जा चुका है। इनमें इस तोप के खरा उतरने पर ही उसके उत्पादन को मंजूरी दी गई है। आयुध निर्माणी बोर्ड के उपनिदेशक व जनसंपर्क अधिकारी गगन चतुर्वेदी ने बताया कि 114 धनुष तोप बनाने का आर्डर आयुध निर्माणी बोर्ड को सेना और रक्षा मंत्रालय ने दिया है।
डेमो पिक
इस तरह रहा है धनुष का सफर
साल 2000 में आयुध निर्माणी कानपुर (ओएफसी) ने बोफोर्स की बैरल अपग्रेड करने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को दिया था। फैक्ट्री ने देश में पहली बार सात मीटर लंबी बैरल बनाई, जिसे 2004 में सेना ने मंजूरी दी। बैरल पास होते ही तोप बनाने का प्रस्ताव भेजा गया। इसके बाद 2011 में बोफोर्स तोप की टेक्नोलॉजी और भारत में इसे बनाने की मंजूरी देने के लिए स्वीडन की कंपनी ने 63 महीने का वक्त मांगा। इस बीच ओएफसी ने भी पहली लंबी दूरी की स्वदेशी तोप बनाने का प्रस्ताव सेना को दिया। सेना ने 18 महीने का वक्त दिया था। इसके बाद ओएफसी, फ ील्ड गन, डीआरडीओ, डीजीक्यूए, सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी रक्षा कंपनी बीईएल, सरकारी इस्पात कंपनी सेल के तालमेल ने रिकार्ड समय में बेहतर नई तोप बनाकर सेना को सौंप दी।
ऐसी है धनुष
- बैरल का वजन 2692 किलो
- बैरल की लंबाई आठ मीटर
- रेंज 42-45 किलोमीटर
- दो फायर प्रति मिनट में
- लगातार दो घंटे तक फायर करने में सक्षम
- गोले का वजन 46.5 किलो
इन खासियतों से लैस है धनुष
इस तोप में इनर्शियल नेवीगेशन आधारित साइटिंग सिस्टम, आटो लेइंग सुविधा, ऑनबोर्ड बैलिस्टिक गणना और दिन-रात में सीधी फायरिंग की सुविधा है। बॉल बैग और बाई माड्यूलर सिस्टम के प्रयोग के कारण इस तोप की रेंज बढ़ गई है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली होने के चलते इसका निशाना भी सटीक है। स्वचालन प्रणाली होने के चलते इसे पहाड़ों में आसानी से तैनात कर निशाना लगाया जा सकता है।