यूं तो कानपुर में अनेकों देवी मंदिर हैं लेकिन कुछ मंदिरों की महत्ता लोगों की जुबान पर बनी रहती है। इन देवी मंदिरों को लेकर भक्तों का मानना है कि देवी में के दर्शन मात्र से ही हर मनोकामना पूर्ण होती है। मां भक्तों को सुख समृद्धि प्रदान करती हैं। जानिए कानपुर के प्रमुख देवी मंदिरों के बारे में...
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मां उजियारी देवी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
मां उजियारी देवी मंदिर
नवाबगंज स्थित मां उजियारी देवी मंदिर देवी आराधना का केंद्र बना हुआ है। यहां शीतला माता विराजमान हैं। इस मंदिर को मां शीतला का शक्तिपीठ कहा जा सकता है। मंदिर के पुजारी आचार्य रजनीश शुक्ल ने बताया कि ब्रिटिश काल में नाना राव पेशवा के समय जब महामारी फैली थी उस समय ही माता की स्थापना की गई। माता के चरणों में चढ़ाया गया जल लगाने से चेचक व त्वचा से जुड़ी समस्याओं से निजात मिलती है। 1857 की क्रांति के समय यह मंदिर क्रांतिकारियों का केंद्र बिंदु था। उस समय मंदिर में लगाए गए नीम व पीपल का पेड़ आज भी यहां मौजूद है। भक्तों का मानना है कि मां उजियारी से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है।
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कूष्मांडा देवी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
कूष्मांडा देवी मंदिर
घाटमपुर में नवरात्र के मौके पर कस्बा स्थित कूष्मांडा देवी मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ लगी है। प्रदेश में कूष्मांडा देवी का एकमात्र मंदिर सिर्फ घाटमपुर में है। माता का प्राकट्योत्सव चतुर्थी तिथि के होने के चलते इस तिथि का विशेष महत्व है। घाटमपुर कस्बा को बसाने वाले राजा घाटमदेव के चरवाहे कुड़हा प्रसाद को माता ने स्वप्न में दर्शन दिए थे। इसके बाद राजा ने संबधित स्थान की खुदाई कराई थी जहां पर माता की मूर्ति लेटी हुई अवस्था में मिली थी। चरवाहे के नाम पर स्थानीय लोग माता कूष्मांडा को कुड़हा देवी के नाम से भी पुकारते हैं।
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बारा देवी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
बारा देवी मंदिर
कानपुर के दक्षिणी इलाके में स्थित बारा देवी मंदिर सिर्फ मंदिर की वजह से ही नहीं, बल्कि इलाके के नाम से भी जाना जाता है। जिस इलाके में यह मंदिर बना है उस इलाके का नाम भी बारा देवी है। सिर्फ इतना ही नहीं इसी के नाम से कानपुर दक्षिण के ज्यादा तर इलाकों के नाम रखे गए है। बारा देवी की सबसे खास बात यह है कि जो भक्त दर्शन के लिए आता है वह अपनी मनोकामना मान कर चुनरी बांधता है। जिसकी भी मन्नत पूरी होती है वह दोबारा यहां आकर मन्नत की चुनरी खोल देता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसमें लोगों का अटूट विश्वास है l
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जंगली देवी मंदिर
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जंगली देवी मंदिर
कानपुर में जंगली देवी मंदिर में इस वक्त भक्तों का तांता लगा हुआ हैl वैसे तो पूरे साल यहां भक्त आते हैं पर नवरात्र में यहां का महत्व और बढ़ जाता है। इससे मंदिर से जुड़ीं कई अनोखी मान्यताएं हैं। कहते हैं कि यहां पर जो भी भक्त ईंट रखकर मुराद मांगता है माता उसकी सारी मुरादें पूरी करती हैं। इतना ही नहीं ये भी कह जाता है कि मूर्ति के पीछे बनी नाली में ईट रखने के बाद उस ईट को निर्माणाधीन मकान में लगाने से तरक्की होती है और घर का काम जल्दी निपट जाता है।
तपेश्वरी देवी मंदिर
तपेश्वरी देवी मंदिर में मां सीता ने तप किया था। बिरहना रोड स्थित मां तपेश्वरी देवी मंदिर का नजारा अलग ही दिखता है। इस मंदिर को लेकर ये कहा जाता है कि माता सीता लवकुश के जन्म के बाद इसी मंदिर में उनका मुंडन संस्कार भी करवाया था। इसके बाद सीता ने लव-कुश को महर्षि वाल्मीकि को सौंपकर इस मंदिर में तप करने के लिए रुक गई थीं। उनके साथ तीन और बहने थीं। सीता को तप करता देख उन तीनों बहनों ने भी सीता के साथ तप करना शुरू कर दिया था। आज भी यहां चार देवियों की मूर्ति स्थापित है। हालांकि, ये कोई नहीं जानता कि कौन सी मूर्ति किसकी है। तप करने की ही वजह से इस मंदिर का नाम तपेश्वरी देवी मंदिर पड़ा।