फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

होली पर तिरंगे में लिपट कर आया जवान का शव, भाई से कहा था होली पर आउंगा घर

Mon, 13 Mar 2017 12:35 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

छत्तीसगढ़ के नक्सली के हमले में शहीद हुआ जिले का लाल
होली पर तिरंगे में लिपटकर आया रामपाल सिंह का शव
भाई से कही थी होली पर छुट्टी लेकर घर आने की बात
शहीद के घर रिश्तेदारों सहित परिजनों, क्षेत्रीय लोगों का जमावड़ा 
 
विज्ञापन
1 of 4
शहीद रामपाल सिंह (फाइल फोटो)
छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में शहीद हुए जिले के लाल का शव तिरंगे में लिपटकर रविवार को गांव पहुंचा तो शोक की लहर दौड़ गई। बड़े भाई राजेश कुमार यादव ने बताया कि रामपाल वर्ष 2004 में लखनऊ से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में बतौर कांस्टेबिल भर्ती हुआ था। डेढ़ साल से उसकी तैनाती छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले सुकमा में थी। शनिवार को नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान रामपाल शहीद हो गए। 

 
विज्ञापन

2 of 4
दरवाजे पर बैठे गमगीन परिजन व रिश्तेदार। - फोटो : अमर उजाला
पिता विश्राम सिंह यादव गांव के प्रधान भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनका छोटा बेटा राजीव पुलिस में है। उसने ही रामपाल से फोन पर शनिवार सुबह आठ बजे के करीब बात की थी। तब उसने होली पर छुट्टी लेकर घर आने की बात कही थी।

 
विज्ञापन

3 of 4
पत्नी के साथ शहीद का परिवार (फाइल फोटो)
कौन जानता था कि उनका लाल अब तिरंगे में लिपटकर होली के दिन ही घर आएगा। उन्होंने कहा कि बेटे की शहादत पर गर्व है। सीओ सोमेंद्र कुमार नेगी ने बताया कि सीआरपीएफ की तरफ से सूचना मिल गई है। राजकीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

 
विज्ञापन

4 of 4
शहीद के बच्चे सत्यम व शुभम। - फोटो : अमर उजाला
दो बच्चों के सिर से उठ गया पिता का साया
सौरिख। रामपाल की शादी 2007 में तिर्वा क्षेत्र के ग्राम गुनहा उमर्दा निवासी रिंकी से हुई थी। घर में पत्नी रिंकी और मां राजेश्वरी देवी सहित सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। दो बच्चे सत्यम (पांच) और छोटा बेटा शुभम ढाई साल का ही है।
 
बच्चे इस बात से अंजान हैं कि उनके सिर से पिता का साया उठ गया है। सभी लोग उसकी शहादत और वीरता के किस्से याद कर रहे थे। गांव में भी उसके सहपाठी सहित अन्य ग्रामीण भी उसके साहस की चर्चा कर रहे थे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें