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‘रहस्यमयी सुरंग’ में जो गया वो नहीं आया वापस, सैकड़ों लोग आज भी लापता

Sat, 06 May 2017 05:17 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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रहस्यमय सुरंग
यूपी के फतेहपुर जिले में एक ऐसी रहस्यमयी सुरंग आज भी मौजूद है जहां जाने वाले कभी लौटकर वापस नहीं आये। सुरंग के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि इस सुरंग को 350 साल पहले मुगल शासक औरंगजेब ने बनवाया था। इसका नाम बागबाद शाही है। फतेहपुर जिले के खजुहा गांव में आज भी ये मौजूद है।   
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रहस्यमय सुरंग
खजुहा गांव के हर्षित, विनोद और नारायण मिश्रा की मानें तो एक बार गांव में शादी समारोह का आयोजन चल रहा था।  बारात में आए सौ से ज्यादा लोग इस सुरंग को देखने के लिए अंदर अंदर घुस गए लेकिन आज तक लौटकर वापस नहीं आए।  
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रहस्यमय सुरंग
गांव के ही बृजबिहारी बाजपेयी की मानें तो ये सुरंग कोलकाता से पेशावर तक जाती है। हालांकि, अब इसे बंद करा दिया गया है। जानकार बताते हैं कि उस वक्त यहां पर शाहजहां के बेटे शाहशुजा का राज था। औरंगजेब ने इसे हड़पने को के लिए अनेक बार यहां पर अटैक किया लेकिन पराजित हुआ। इसके बाद 5 जनवरी, 1659 को औरंगजेब ने फिर से यहां पर अटैक किया और शाहशुजा को पराजित कर कब्जा कर लिया।  

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रहस्यमय सुरंग
औरंगजेब ने जीत की खुशी में यहां जश्न मनाया और इस बागबादशाही को तैयार करवाया। बागबादशाही में पूरब दिशा की ओर तीन मीटर ऊंचे चबूतरे में दो बारादरी तैयार की गई हैं। इनमें बड़े कमरे भी बनाए गए थे, जो बारादरी बनी थी उसके सामने एक सुंदर तालाब बनाया गया था।
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रहस्यमय सुरंग
एक कुआं भी तैयार किया गया है, जोकि बागबादशाही के बीच में बना हुआ है। बागबादशाही के चारों ओर ऊंची-ऊंची दीवारें और बुर्ज तैयार किए गए थे। जानकारों के मुताबिक इन्हीं बारादरी में औरंगजेब रहता था, जबकि बारादरी के सामने बगीचा हुआ करता था। 
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रहस्यमय सुरंग
उत्तर की ओर चहारदीवारी में तीन बड़े-बड़े कुएं तैयार किए गए थे, जो हजारों फीट गहरे हैं। ये कुएं आज भी यहां देखे जा सकते हैं। इनमें बड़ी-बड़ी जंजीरें पड़ी हुई हैं। बताया जाता है कि इन कुओं से बगीचे में पानी पहुंचाया जाता था। यहां पर पश्चिम में एक बड़ा गेट है, जबकि दूसरा गेट खजुहा गांव की ओर है। इन दरवाजों के ऊपर चढ़कर पूरे बागबादशाही का दृश्य देखा जा सकता है। गांव के अंदर चारों ओर दीवारें बनी हुई हैं और बड़े फाटक तैयार किए गए हैं। कहा जाता है कि यहां पर एक बड़ा हॉल हुआ करता था जिसमें घोड़े और सिपाही रहते थे। ​
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