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बुझती जा रही मिट्टी के दीप की रोशनी, जानें क्या हैं कारण

Wed, 11 Oct 2017 12:41 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
अगर ये कहा जाए कि दीप बिन दीवाली सूनी है तो शायद गलत न होगा। मिट्टी के दीप से गुलजार होने वाली दीवाली पर चाइनीज लाइट का ग्रहण सा लग गया है । दीवाली पर मिट्टी के दीप की बिक्री में कमी आनें से कुम्हार काफी परेशान हैं।
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दीवाली के अवसर पर कुम्हारों को मिट्टी के दीप बनाने से फुर्सत नहीं मिलती थी। लेकिन पिछले कुछ सालों से चाइनीज लाइट के अधिकाधिक प्रयोग से मिट्टी के दीप की बिक्री में भारी कमी आई है। इससे कुम्हारों परिवारों पर रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।

 
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कानपुरः  दीपावली के अवसर पर मिट्टे के बर्तन जिनमें विशेष रूप से दीप,  बनने वाले क्षेत्रों में रात दिन चाक चलने की आवाजें आया करती थीं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से चाइनीज झालरों के बाजार में आ जाने से इन क्षेत्रों के साथ साथ कुम्हारों के आंगन सूने सूने से प्रतीत होते हैं। कुम्हारों की आमदनी घटी है, कई परिवार तो इस पुस्तैनी धंधे को छोड़ चुके हैं तो कई परिवार छोड़ने के लिए मजूबर हैं। 
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