शरद पूर्णिमा की किरणें विशेष लाभदायी, ऊर्जा से भरी और औषधियुक्त होती हैं। इस दिन चंद्र किरणों से विशेष ऊर्जा निकलती है जो मानव शरीर के तमाम रोगों को दूर करती है। एेसा कहा जाता है कि इस चंद्र पूर्णिमा की रात रावण चंद्र किरणों को दर्पण द्वारा अपनी नाभि में ग्रहण करता था, इससे उसे शक्ति प्राप्त होती थी।
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शरद पूर्णिमा पांच अक्तूबर को है। आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। वैसे तो पूर्णिमा हर महीने होती है लेकिन शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। डॉ. आदित्य पांडेय के अनुसार ऐसी मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें अमृतमयी गुणों से युक्त होती हैं, जो कई बीमारियों को खत्म कर देती हैं।
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रात में छत पर खीर रखे जानें का कारण
शरद पूर्णिमा की रात को लोग घरों की छतों पर खीर रखते हैं, इससे चंद्रमा की किरणें (रात 9 से 12 बजे के बीच) उस खीर के संपर्क में आती हैं। इस खीर को खाने से शरीर को विशेष ऊर्जा मिलती है।
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श्रीकृष्ण ने रचाया था रास
ज्योतिषाचार्य दीपक पांडेय के अनुसार ऐसी मान्यता है इस दिन माता लक्ष्मी रात में यह देखने के लिए घूमती हैं कि कौन जाग रहा है। जो जाग रहा होता है, महालक्ष्मी उसका कल्याण करती हैं। शरद पूर्णिमा को रासलीला की रात भी कहते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार इसी दिन श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रास रचाया था।
खीर का वैज्ञानिक महत्व
शरद पूर्णिमा से मौसम में परिवर्तन की शुरुआत होती है। इस दिन से शीत ऋतु का आगमन होता है। शरद पूर्णिमा पर खीर खाने के पीछे एक कारण यह भी है कि इस दिन से गर्म चीजों का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए, इससे जीवनदायिनी ऊर्जा प्राप्त होती है।
दूध में लैक्टिक अम्ल होता है। यह किरणों से शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर को खुले आसमान के नीचे रखने और अगले दिन खाने का विधान तय किया था।