कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस की छात्रा अमृता सिंह (24) के खुदकुशी मामले में उसके पिता ने गुरुवार को एसएसपी दफ्तर व स्वरूपनगर थाने में कॉलेज प्रशासन के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर में मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य, विभागाध्यक्ष समेत चार डॉक्टरों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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अमृता सिंह की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
इटावा में ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग में इंजीनियर रामसनेही के मुताबिक बेटी अमृता पढ़ाई में अव्वल थी। कॉलेज प्रशासन पढ़ाई के दबाव के कारण अमृता के खुदकुशी करने की बात कह रहा है, जो पूरी तरह झूठी है। अमृता बहुत साहसी थी। पढ़ाई को लेकर वह किसी तरह की दिक्कत में नहीं थी।
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एमबीबीएस छात्रा की मौत का मामला
- फोटो : अमर उजाला
वह खुदकुशी नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया है कि कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लाल चंदानी, विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरि, डॉ. यशवंत और डॉ. किरन पांडेय बेटी का उत्पीड़न करते थे। अमृता को खुदकुशी करने पर मजबूर किया गया है। इसके लिए कॉलेज प्रशासन जिम्मेदार है।
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ये है घटना
मूलरूप से जालौन के रामपुरा थाना क्षेत्र के जगम्मनपुर गांव निवासी रामसनेही की बेटी अमृता सिंह मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस (अंतिम वर्ष) की पढ़ाई कर रही थी। 23 जनवरी को वह लापता हो गई थी। दूसरे दिन गंगाघाट थाना क्षेत्र में अमृता का शव गंगा में उतराता मिला था। मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल के अमृता के कमरे से साढ़े तीन पेज का सुसाइड नोट मिला था। रामसनेही का झांसी में भी घर है।
एमबीबीएस छात्रा की मौत का मामला
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आरोप निराधार, मानहानि का केस करेंगे
प्राचार्य डॉ. आरती लाल चंदानी ने कहा कि अमृता के पिता के आरोप निराधार व झूठे हैं। सुसाइड नोट में अमृता ने कॉलेज प्रशासन पर किसी भी तरह का आरोप नहीं लगाया है। अमृता अपने परिवार से परेशान थी। वह अपने घरवालों से डरती थी। इसी डर की वजह से उसने खुदकुशी की। डॉ. चंदानी ने कहा कि मामले में परिजनों पर मानहानि का केस करेंगे।
छात्रा के परिजनों ने तहरीर दी है। जांच की जा रही है। जांच में जो साक्ष्य व सुबूत मिलेंगे, उसी के आधार पर कार्रवाई होगी। - अनंत देव, डीआईजी