डेमो पिक
हालात यहां तक पहुंच गए कि एचआईवी पीड़ित बच्चों को उनके अभिभावकों ने स्कूल भेजना बंद कर दिया, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। लोग दहशत के माहौल से उबर रहे हैं। हालांकि सरकारी मशीनरी की ओर से जागरुकता के संबंध में अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया है, इसे लेकर लोगों में आक्रोश है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जागरुकता बढ़ी है।