यूपी के कानपुर में रविवार को जीएनके इंटर कॉलेज में रामकथा के तीसरे दिन मंदाकिनी दीदी ने जीवन के रहस्यों और मनुष्य के स्वभाव के बार में बताया। उन्होने कहा कि जब दुष्ट और धूर्त व्यक्ति के आचरण में बदलाव दिखने लगे तो तत्काल सतर्क हो जाएं। कारण है कि उसके दिमाग में आपके प्रति कुछ न कुछ अनिष्ट करने की योजना चल रही होगी।
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मंदाकिनी दीदी
- फोटो : अमर उजाला
श्रीरामलीला सोसाइटी परेड की ओर से आयोजित श्रीरामकथा में उन्होंने कहा कि जीवन में संगति का बहुत असर होता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण आपको रामायण में देखने को मिलेगा। माता कैकेयी श्रीराम को भरत से भी अधिक स्नेह करती थी।
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मंदाकिनी दीदी
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मंथरा की संगति होने से उनके मन में भरत को राजपाट दिलवाने और श्रीराम को वनवास का विचार चलने लगा था। इस कारण उन्होंने राजा दशरथ के प्रति अपना व्यवहार भी बदल लिया था। तब राजा दशरथ को कैकेयी के व्यवहार का समझ आया।
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मंदाकिनी दीदी
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ठीक इसी प्रकार से रावण ने माता पार्वती को अपनी तपस्या से काफी खुश कर दिया था। तब पार्वतीजी ने भगवान शिव से रावण की प्रशंसा की। तब भगवान शिव ने पार्वती से कहा कि आपको रावण का व्यवहार समझ नहीं आ रहा है वह धूर्त है।
उन्होने कहा कि आप उसके व्यवहार के कारण अपनी सोच न बदलें। वह दुष्ट है और धूर्त है। मंदाकिनी दीदी ने कहा कि रामायण को अवश्य पढ़ें। यह जीवन जीने की कला सिखाती है।