औरैया के दिबियापुर-बेला मार्ग पर ग्राम गपचरियापुर में सवारियों से भरे आटो और आम से लदे डीसीएम की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। आटो में सवार चार शिक्षकों समेत सात की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि एक शिक्षिका ने सहार सीएचसी में दम तोड़ दिया। दो घायलों का उपचार चल रहा है। सड़क पर शवों के रखे होने के कारण तीन घंटे तक औरैया-कन्नौज मार्ग पर यातायात ठप रहा।
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सड़क हादसे के बाद बिखरी पड़ी लाशें
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार को सुबह लगभग पौने सात बजे दिबियापुर से आटो चालक पंकज पाठक (35) निवासी पुरवा भिखनी आटो में नौ सवारियां बैठाकर सहार के लिए चला। दिबियापुर से 11 किलोमीटर आगे सहायल थाना क्षेत्र के ग्राम गपचरियापुर के सामने एक तेज गति बोलेरो ने आटो को ओवरटेक किया।
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हादसे में ऑटो के परखच्चे उड़ गए
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इसके चलते आटो चालक सामने से तेज गति आ रहे आम से लदे डीसीएम को देख नहीं पाया और आटो व डीसीएम में आमने-सामने भिड़ंत हो गई। डीसीएम सड़क किनारे खड़े पेड़ से टकराकर रुक गया। जबकि आटो सड़क किनारे जाकर पलट गया। टक्कर से हुए तेज धमाके को सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण दौड़ कर घटनास्थल पर पहुंचे।
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सड़क हादसे में 8 लोगों की मौत के बाद बदहवास परिजन
- फोटो : अमर उजाला
जल्दी-जल्दी आटो और डीसीएम के पहिये के नीचे दबी सवारियों को ग्रामीणों ने बाहर निकाला। दिबियापुर (औरैया)। शनिवार के हादसे में लखीमपुर खीरी निवासी शिक्षक दिनेश कुमार वर्मा अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। जबकि आटो चालक पंकज अपनी मां का अकेला सहारा था। शिक्षक दिनेश कुमार वर्मा पुत्र रामपाल मूलरूप से लखीमपुर खीरी के रहने वाले थे।
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बदहवास परिजन
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वह आयोग से चयनित होकर दो वर्ष पहले ही जनता इंटर कालेज में कला शिक्षक के रूप में तैनात हुए थे। पत्नी के साथ सहायल रोड पर किराए पर रहते थे। जबकि उनकी बेटी लखीमपुर खीरी में रहकर पढ़ाई कर रही है। वह अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। मूल रूप से सहायल क्षेत्र के ग्राम भिखनी का पुर्वा के मूल निवासी आटो चालक पंकज पाठक पुत्र रामबाबू पाठक के पिता की मृत्यु हो चुकी थी।
एक्सीडेंट के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने लगाया जाम
- फोटो : अमर उजाला
पत्नी से भी विवाद होने पर दिबियापुर में मां के साथ रहते थे। ईश्वर ने मां का इकलौता सहारा भी छीन लिया। शांतिनगर निवासी शिक्षिका स्वरूपा शुक्ला के पति प्रमोद शुक्ला मूल रूप से औरैया के जैतापुर के रहने वाले हैं। जबकि अबाबर निवासी जमील खां के परिजनों का कहना है कि वह दैनिक मजदूरी पर सहार में बतासा बनाने के लिए जाते थे। वह आज भी सहार जा रहे थे। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से जमील के परिजनों को आर्थिक मदद दिलाए जाने की गुहार लगाई है।