यूपी के हमीरपुर जिले के सरीला कस्बे चंदेल कालीन शल्लेश्वर मंदिर लोगों की आस्था व श्रद्धा का केंद्र तो है ही, लेकिन यहां कई ऐतिहासिक अनबुझे पहलू समाए हैं।
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मंदिर के मुख्य द्वार पर लगे शिलालेख को आज तक कोई पढ़ नहीं सका है। शिवरात्रि पर 42 साल से यहां शिव बारात का आयोजन होता है और भक्तों का तांता लगा रहता है।
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शल्लेश्वर मंदिर समिति अध्यक्ष ने कहा कि कस्बे के मध्य ऊंचाई वाले इलाके में स्थापित शल्लेश्वर मंदिर का निर्माण व इतिहास आज तक उजागर नहीं हो सका है।
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मंदिर व मठों की तर्ज पर पत्थर के शिलापट्टों से बने इस मंदिर को चंदेल कालीन माना जाता है। मंदिर के गर्भ में भारी भरकम शिवलिंग स्थापित है।
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इस मंदिर के बारे में यह भी किदवंती है कि कस्बा प्राचाीन काल में राजा शल्य की राजधानी रहा है। ऊंचाई वाले व मध्य क्षेत्र में यह मंदिर होने से लोग इसे राजा शल्य के महल का मंदिर भी बताते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर एक शिलालेख लगा है।
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लोगों का यह भी दावा है कि मंदिर का शिवलिंग हर वर्ष एक चावल जितना लंबा व मोटा हो रहा है। इसकी प्रमाणिकता महा शिवरात्रि पर की जाती है।