कोरोना वायरस से बचने के लिए किए गए लॉकडाउन की मार गरीबों मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों पर सबसे अधिक पड़ी है। दूसरे राज्यों से लौटे प्रवासी श्रमिकों को न काम मिल रहा है न पेट भरने के लिए खाना। बच्चे भूख से बिलखने के लिए मजबूर है। प्रवासियों को राशन और मनरेगा में काम भले ही कागजों में मिल रहा हो पर असल में कईयों के घरों में ताे चूल्हा भी नहीं जला है।
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प्रवासी मजदूर के परिवार को नहीं नसीब हो रहा एक टाइम का खाना
- फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के कन्नौज में लॉकडाउन के दौरान तमिलनाडु से लौटे प्रवासी परिवार को गांव में न मुफ्त राशन मिला और न ही मनरेगा में काम। बच्चों की भूख से बिलखते देख मां ने आधे दाम में तोड़िया बाजार में बेच दीं। कन्नौज के फत्तेहपुर जसोदा निवासी श्रीराम अपनी शादी के कुछ समय बाद पत्नी गुड्डी देवी को लेकर तमिलनाडु के किड्डलोर चला गया था।
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घर में नहीं जला चूल्हा
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वहां वह करीब 30 साल से कुल्फी बेचने का काम कर रहा था। इससे पति, पत्नी और नौ बच्चों का गुजारा चल रहा था। लॉकडाउन में काम बंद होने से 18 मई को श्रीराम पत्नी और बच्चों को लेकर ट्रेन से गांव लौट आया। भूमिहीन श्रीराम का यहां राशनकार्ड भी नहीं है। उसने आरोप लगाया कि कोटेदार ने राशन और प्रधान ने मनरेगा में रोजगार देने से इंकार कर दिया।
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पेट भूखा पर चेहरे पर मुस्कान
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काम न होने से परिवार के सामने भोजन तक का संकट खड़ा हो गया। कहीं से कोई मदद नहीं मिली तो गुड्डी देवी ने दो जून को तीन हजार की तोड़िया 1500 रुपये में बेच दी। इन पैसों से राशन लाकर बच्चों को खाना खिलाया। श्रीराम ने बताया कि अब खेतों में परिवार के साथ मजदूरी पर भुट्टा तोड़ने का काम कर रहा है। इसी से ही जैसे तैसे खर्च चल रहा है।
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खाने को नहीं मिल रहा खाना
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गांव में किसी तरह की सरकारी योजना का लाभ न मिलने का मलाल है। ट्रेन चालू होते ही परिवार के साथ तमिलनाडु लौट जाएंगे। ग्राम प्रधान आशा देवी का कहना है कि श्रीराम ने उनसे संपर्क नहीं किया है। उसका मनरेगा जॉबकार्ड बनवाने के साथ अन्य योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।
भाईयाें को भूख से तड़पता देख बहन ने कहा मेरा लैपटाप बेच दो
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बड़ी बेटी बेचना चाहती है सरकार से मिला लैपटॉप
श्रीराम की 20 वर्षीय बड़ी बेटी सुलोचना इंटर कर चुकी है। तमिलनाडु सरकार की ओर से उसे फ्री लैपटाप मिला है। लॉकडाउन में गांव आने के बाद परिवार आर्थिक रूप से परेशान है। भाईयों को भूख से बिलखता देख बहन रो पड़ी। परिवार को परेशान देख सुलोचना अपना लैपटॉप बेचना चाहती है। इसके लिए वह खरीदार ढूंढ रही है।