कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों को घरों तक पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनों और बसों के सरकारी इंतजाम शनिवार को औरैया हादसे में जान गंवाने वालों के साथ दम तोड़ते नजर आए। बेबस मजदूर अभी भी पैदल या माल वाहक वाहनों से घर तक का सफर करने को मजबूर हैं।
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हादसे में घायल मासूम को लेकर भागता युवक
- फोटो : amar ujala
औरैया में शनिवार भोर में हुए हादसे के बाद चूने के बोरे में दबे मजदूरों की छटपटाहट व्यवस्था की लाचारियां बयां कर रही थी। मौके से लेकर अस्पताल तक चीखें और सिसिकियां ही गूंज रही थीं। हादसे की जानकारी पाकर डायल 112 की पुलिस टीम हादसे के करीब 20 मिनट बाद मौके पर पहुंची।
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सैफई मिनी पीजीआई में भर्ती किए गए गंभीर रूप से घायल मरीज
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बड़ी संख्या में मजदूरों को चूने की बोरियों में दबा देख पुलिस भी तत्काल मददगार न बन सकी। गहरा अंधेरा और खड्ड की गहराई आड़े आ रही थी। ट्राला में भरे बोरों से उठा चूने का गुबार पूरे वातावरण में घुटा हुआ था। बाद में जेसीबी, क्रेन और ज्यादा फोर्स पहुंचने पर बचाव कार्य शुरू किया जा सका।
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शवों को निकालने के लिए लगाई गई जेसीबी
- फोटो : amar ujala
शवों और घायलों को निकालने का सिलसिला शुरू हुआ। घायलों ने बताया कि सागर मध्य प्रदेश और झांसी के रहने वाले मजदूरों ने घर वापसी के लिए गाजियाबाद से 30 हजार रुपये में एक डीसीएम बुक की थी। औरैया में राजस्थान से चूना लादकर पश्चिम बंगाल जा रहे ट्राला से डीसीएम की टक्कर हो गई।
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सुबह तीन बजे हुआ था हादसा
- फोटो : amar ujala
ट्रॉला में झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और यूपी जाने के लिए लोग सवार थे। डीसीएम सवार गोविंदा ने बताया कि डीसीएम में कुल 22 लोग सवार थे। इसमें चार लोगों को झांसी तक जाना था। उसके साथ मौजूद 18 लोगों ने 30 हजार रुपये में गाजियाबाद से सागर मध्य प्रदेश के लिए डीसीएम बुक कराई थी।
बोरियों के नीचे दबने से हुई श्रमिकों की मौत
- फोटो : amar ujala
वह सभी जींस में कलर करने का काम करते थे। ट्राला में सवार घायल अंकुर ने बताया कि ट्राला राजस्थान से पश्चिम बंगाल जा रहा था। ट्राला में पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, यूपी के कुशीनगर जाने के लिए लोग सवार थे। ट्राला में सवार लोगों से उनके सफर के हिसाब से चालक व हेल्पर रुपये ले रहा था। किसी से पांच सौ तो किसी से आठ सौ रुपये लिए थे।