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भविष्य से खिलवाड़: स्कूल में अध्यापिका 'छात्रा से जो कुछ करा रही थी' उसे देख हैरान रह जाएंगे आप

Fri, 04 May 2018 03:32 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

- एक स्कूल में बस्ते मौजूद, बच्चे गायब
- गुरुजी को खुद नहीं पता, आज दिन कौन सा है
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प्राथमिक स्कूल - फोटो : अमर उजाला
झाडू लगाते बच्चे, कक्षाओं में बिछी चटाई, बच्चों के बजाय चटाई पर रखे उनके बस्ते और कक्षाअों में बात-चीत में मशगूल अध्यापिकाएं... यह हाल है यूपी के अौरैया जिले में फफूंद के प्राथमिक स्कूलों का। शिक्षा सत्र शुरू हुए पूरा महीना बीत चुका है लेकिन प्राथमिक स्कूलों के अध्यापकों का ढर्रा बदलने का नाम ही नहीं ले रहा। पेश है अमर उजाला टीम की प्राथमिक स्कूलों के पड़ताल की लाइव रिपोर्ट... 
 
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प्राथमिक स्कूल - फोटो : अमर उजाला
फफूंद के प्राथमिक स्कूलों में कहीं बच्चे झाड़ू लगा रहे हैं, तो कहीं छुट्टी के समय बच्चों को मिड डे मील अपने मन मर्जी का दिया जा रहा है। कहीं अध्यापिका मीडिया के पहुंचने के बाद 11 बजे बच्चों की उपस्थिति रजिस्टर पर चढ़ा रही हैं। तो कहीं बच्चों की संख्या रजिस्टर में ज्यादा है। स्कूल में सिर्फ चटाई बिछी दिखाई दे रही है। जिन पर बस्ते रखे हैं। जहां-जहां अध्यापिका हैं वह आपस में बातों में मशगूल दिखाई दीं।
 
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सीन नम्बर एक......

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स्कूल में झाड़ू लगाती छात्रा - फोटो : अमर उजाला
स्कूल में झाड़ू लगाते मिली छात्रा 
जब अमर उजाला टीम दिन ने 11 बजे पूर्व माध्यमिक विद्यालय गदनपुर में पहुंची तो वहां पर एक छात्रा स्कूल में झाड़ू लगा रही थी। सहायक अध्यापिका प्रभा देवी खड़ी होकर के बच्चों से झाड़ू लगवा रही थी। विद्यालय में पंजीकृत बच्चो की संख्या 43 है। जबकि हकीकत में तीन बच्चे ही वहां मौजूद थे। जिनका नाम नेहा पुत्री जगदीश बाबू, अंजली पुत्री लक्ष्मी नारायण व गुड्डी है। बच्चों से पूछा तो उन्होंने बताया की मैडम हमसे रोज झाड़ू लगवाती है। मिड डे मील के बारे में पूछा तो बच्चों ने बताया मिडडे मील नहीं मिलता है। जब हकीकत जानने के लिए रसोई घर में गए तो वहां पर ताला पड़ा था। रसोईया आशा देवी और राधा देवी वहां पर बैठ करके बातो में मशगूल थी। रसोइयों से मिड डे मील के बारे में पूंछा तो उन्होंने बताया गैस नहीं है। इसलिये खाना नहीं बन पाया। विद्यालय में बने शौचालय में ताला पड़ा था।
 

सीन नम्बर दो.....

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कक्षा में रखे तीन बस्ते।  - फोटो : अमर उजाला
64 बच्चों में सिर्फ आठ ही मौजूद मिले 
अमर उजाला टीम 11:30 बजे प्राथमिक विद्यालय गदनपुर में पहुंची तो वहां पर मौजूद प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापिका बातों में मशगूल थीं। एक चटाई बिछी थी जिस पर तीन बस्ते रखे हुए थे, लेकिन बच्चों का कोई पता नहीं था। प्रधानध्यापिका शबे नूर ने पहले तो मीडिया टीम पर अपना रोब जमाना चाहा। लेकिन टीम के सवाल पूछते ही वह ढीली पड़ गईं, फोन लगाकर सिफारिश के लिए बात कराने लगी। विद्यालय में पंजीकृत संख्या 64 है। जिसमें मात्र आठ बच्चे उपस्थित थे। जब बच्चो की संख्या देखने क्लास के अंदर गये तो वहां पर शिक्षा मित्र अनिल कुमार बच्चो को पढ़ा रहे थे। बच्चो की कुल संख्या पांच थी। जब बच्चो से खाने के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया आज तहरी दी गई थी। उसी बीच शिक्षा मित्र अनिल कुमार कहने लगे कि आज तो शुक्रवार है मीनू के अनुसार आज के दिन तहरी दी जाती है। अब ऐसे गुरु जी बच्चो को क्या पढ़ायेंगे जिनको दिन का ही नही पता की आज कौन सा दिन है। जब शौचालय की स्थिति देखी तो शौचालय में ताला पड़ा हुआ था। विद्यालय के प्रांगण में व विद्यालय के बहार गंदगी व्याप्त थी। मीडिया टीम के पहुंचने पर विद्यालय में बच्चों के कई अभिभावक पहुंच गये। रवी राजपूत ने बताया कि विद्यालय कभी समय पर नहीं खुलता है । विद्यालय में पढ़ाई भी सही ढंग से नहीं होती है।मिड डे मील भी मीनू के अनुसार नहीं दिया जाता है ।
 
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सीन नम्बर तीन.......

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बच्चों की हाजिरी मेनटेन करती अध्यापिका  - फोटो : अमर उजाला
सब्जी रोटी खाते मिले बच्चे 
अमर उजाला टीम 11:45 पर प्राथमिक विद्यालय धर्मपुर में पहुंची तो वहां पर बच्चे सब्जी रोटी का स्वाद ले रहे थे। वहां पर मौजूद सहायक अध्यापिका मृदुला शुक्ला मीडिया टीम को देख कर के तुरंत ऑफिस में जाकर के रजिस्टर में पंजीकृत बच्चो की उपस्थिति दर्ज करने लगीं। जब टीम ने प्रधानाध्यापक कौशल किशोर से पूछा कि इस समय बच्चों को खाना दिया जा रहा तो वह कुछ नहीं बोले । विद्यालय में बच्चो की पंजीकरण संख्या 45 है। जबकि हकीकत में मात्र छह बच्चे ही मौके पर मौजूद थे उसमें भी एक बच्चा सहायक अध्यापिका का था जो मोबाइल से खेल रहा था। विद्यालय में बने शौचालय में ताला पड़ा था। स्कूल के प्रांगण में गंदगी का अंबार था। आवारा जानवर स्कूल के प्रांगण में घूम रहे थे।वही विद्यालय में मौजूद रशोईया राजेश्वरी देवी व कमला देवी ने बताया की विगत तीन माह से वेतन न मिलने के कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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