मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने पिता का सपना पूरा किया है। यदि वह आज होते तो बहुत खुश होते, उनकी कमी को पूरा तो नहीं किया जा सकता, लेकिन उनके सपने को साकार करने का मैं पूरा प्रयास कर रहा हूं...। सफलता की यह दास्तां है मुश्किलों को जीत लेने वाले कानपुर शहर के बाशिंदे लेफ्टिनेंट श्रीकांत मिश्रा की।
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लेफ्टिनेंट श्रीकांत
श्रीकांत जब हाईस्कूल में थे, उनकी परीक्षा शुरू होने के ठीक दो दिन पहले पिता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पिता की हत्या के बाद परिवार पूरी तरह से टूट गया था।
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लेफ्टिनेंट श्रीकांत
श्रीकांत घर के सबसे बड़े बेटे थे। इन हालात में भी ही उन्होंने एग्जाम दिया, उन्हें 92 प्रतिशत नंबर मिलेे थे। इंडियन आर्मी में जाने की चाह ने उन्हें अब लेफ्टिनेंट बना दिया। बेटे की इस उपलब्धि पर परिवार में खुशी का माहौल है। वह ज्वाइनिंग लेटर लेकर पहली बार घर आए हैं।
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लेफ्टिनेंट श्रीकांत
बर्रा आठ में रहने वाली गीता देवी के पति मनोज मिश्रा की 7 मार्च 2011 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मनोज मैथा ब्लॉक में एक प्राइमरी स्कूल में टीचर थे। रंजिश के चलते किदवई नगर में गोली मारी गई थी।
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लेफ्टिनेंट श्रीकांत
हत्यारोपियों को उम्र कैद की सजा हो चुकी है। परिवार में बेटा श्रीकांत मिश्रा और बेटी नयन मिश्रा हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद गीता देवी ने हिम्मत नहीं हारी और बेटे को पढ़ाया-लिखाया। आज उसी बेटे पर पूरे परिवार को नाज है।
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लेफ्टिनेंट श्रीकांत
गीता देवी ने बताया कि पति चाहते थे बेटा आर्मी ज्वाइन करे, वे इसके लिए प्रेरित करती रहीं।
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लेफ्टिनेंट श्रीकांत
22 को मिला है ज्वाइनिंग लेटर
श्रीकांत ने बताया कि पिता के मर्डर के बाद मैं और पूरा परिवार टूट गया था। इंटर में मेरे 93 फीसदी नंबर आए। इसके बाद मैं सोचने लगा कि क्या करूं, मेरे पिता के दोस्त इंद्र कुमार जो एयरफोर्स में विंग कमांडर के पद पर तैनात हैं, उनके प्रोत्साहन पर इंटर के बाद टीईएस (टेक्नीकल एंट्री स्कीम) का इंटरव्यू दिया। इसमें मेरिट को देखकर सेलेक्शन होता है।
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लेफ्टिनेंट श्रीकांत
2013 में टीईएस की रैंक 85 फीसदी थी जिसमें मुझे इस परीक्षा में बैठने का मौका मिल गया। टीईएस की परीक्षा लाखों लोगों ने दी थी। जिसमें 450 लडकों का सेलेक्शन हुआ था।
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लेफ्टिनेंट श्रीकांत
एसएसबी में 450 लडकों में से 30 युवा छांटे गए। ग्रुप डिस्कशन, ग्राउंड टास्क आदि के बाद नौ लड़के पास हुए। जब मेडिकल हुआ तो मात्र छह लड़कों का सेलेक्शन हुआ। इसके बाद एक साल की ऑफिसर ट्रेनिंग बोध गया से की।