बिहार प्रांत के थाना भगवानपुर के गांव भगुआ निवासी सिप्रा सिंह (25) पुत्री अशोक सिंह मृतका शिप्रा सिंह करीब डेढ़ साल पहले पंजाब प्रांत में एक बैंक में संविदा कर्मी थी। घर वालों ने बताया कि उन्नाव के बारासगवर थानाक्षेत्र के हिलगी गांव का मूल निवासी अनूप सिंह वहीं लांस नायक के पद पर तैनात था। अनूप का बैंक खाता उसी बैंक में था। दोनों की पहली मुलाकात बैंक में हुई थी। सुबह पार्क में मॉर्निंग वॉक के दौरान दोनों की मुलाकातें बढ़ीं और दोस्ती प्यार में बदल गई। 1 जुलाई 2017 को दोनों ने विवाह कर लिया। शादी के चार महीने बाद ही शिप्रा ने बैंक की नौकरी छोड़ दी थी। शिप्रा के नौकरी छोड़ने के कुछ दिन बाद अनूप छुट्टी लेकर घर आ गया। इसके बाद वापस नहीं गया था। घटना यूपी के उन्नाव जिले की है। आगे की स्लाइड में पढ़ें 'मोहब्बत से मौत तक' का पूरा घटनाक्रम...
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शिप्रा ने तलाश शुरू की तो उसे अनूप के पहले से शादीशुदा होने की जानकारी मिली। वह 25 अक्तूबर को उन्नाव आई थी। शहर कोतवाली में फौजी की पत्नी गीता ने उसे किसी भी कीमत में साथ न रखने की बात कही। इससे आहत होकर उसने कोतवाली परिसर में ही जहर पी लिया। इलाज के दौरान शनिवार सुबह मौत हो गई। शनिवार रात उन्नाव पहुंचे मृतका के पिता अशोक सिंह की तहरीर पर पुलिस ने फौजी अनूप सिंह व उसकी पत्नी गीता के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज किया है। मालूम हो कि शिप्रा की तहरीर पर पुलिस अनूप के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा पहले ही चल रहा है। कोतवाल अरुण द्विवेदी ने बताया कि रात में ही दो डॉक्टरों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद घर वाले शव लेकर चले गए हैं।
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उन्नाव सदर कोतवाली परिसर में जहर पीकर जान देने वाली बिहार प्रांत की रहने वाली शिप्रा ने अपने फौजी पति की बेवफाई की सजा खुद को दी। धोखा खाने के बाद भी उसने हालात से समझौता किया और दूसरी पत्नी बनकर रहने को भी तैयार हो गई। लेकिन फौजी और उसकी पहली पत्नी ने साफ इंकार कर दिया। आहत शिप्रा ने पति के नाम पर मर जाने की बात कहकर खुदकुशी कर ली थी। शनिवार रात उसके पिता व अन्य परिजन कोतवाली पहुंचे और फौजी व उसकी पत्नी पर शिप्रा को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज कराया। रात में ही दो डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने के बाद घर वाले शव लेकर चले गए।
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मृतका के पिता अशोक सिंह के मुताबिक वह चार भाई-बहनों में बड़ी थी। पढ़ाई में भी वह तेज थी। उन्होंने बताया कि बिहार पुलिस में भी उसका नाम आया था। लेकिन लड़की पुलिस की नौकरी करे यह उन्हें अच्छा नहीं लगता था इसलिए ज्वाइन नहीं कराया था। बाद में पीएनबी बैंक में उसका संविदा पर तैनाती हो गई। मौजूदा समय में जम्मू में तैनात अनूप सिंह के खिलाफ दर्ज हुए दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने के मुकदमे की सूचना सैन्य अधिकारियों को भेजी जा रही है। शहर कोतवाली प्रभारी अरुण द्विवेदी ने बताया कि पुलिस टीमें लगाई गई हैं और दोनों की गिरफ्तार के प्रयास किए जा रहे हैं।
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कोतवाली में जहर पीने पर पीड़िता को पुलिस जिला अस्पताल ले गई थी। जहां से डॉक्टरों ने हालत गंभीर देख कानपुर हैलट अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। पुलिस कानपुर के हैलट अस्पताल की बजाए शहर के ही एक निजी अस्पताल में उसको भर्ती करा दिया। जहां दो दिनों तक इलाज के बाद शनिवार को सिप्रा ने दम तोड़ दिया। इसके पीछे भी पुलिस द्वारा मामले में परदा डालने का प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि अब इन सवालों के जवाब में कोतवाली प्रभारी व सीओ के बयान मामले को पेचीदा बना रहे हैं।
कोतवाली प्रभारी अरुण द्विवेदी ने बताया कि सिप्रा सिंह को बिना देर किए जिला अस्पताल पहुंचाया। बेहतर इलाज के लिए शहर के एक नर्सिगहोम के आईसीयू में भर्ती कराकर इलाज कराया। डॉक्टरों द्वारा खून की कमी बताने पर पीड़िता को दो यूनिट खून भी दिया। महिला की जान बचाने का हर संभव प्रयास किया पर अफसोस की बात है कि उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। हालांकि पीड़िता की शिकायत क्यों नहीं दर्ज की, इस संबंध में वो चुप्पी साध गए। वहीं सीओ उमेशचंद्र त्यागी ने बताया कि जिस दिन सिप्रा सिंह उनके पास आई थी। तभी कोतवाल को दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। बाकी समझौता के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही थी। जिस समय पीड़िता यहां आई थी, परेशान थी। कोतवाल से एक महिला सिपाही को उसके साथ रखने के लिए कहा गया था। इसके बाद भी महिला को बिना सिपाही के कोतवाली से भेजा गया। जिससे पीड़िता ने यह कदम उठा लिया।