उन्नाव नाबालिग से दुष्कर्म में कुलदीप सेंगर के गांव में हर तरफ सन्नाटा है। गांव के लोगों में कुलदीप सेंगर पर दोष सिद्ध होने और उम्रकैद की सजा को लेकर आपसी चर्चा तो है लेकिन कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। सोमवार को दुष्कर्म का दोष साबित होने के बाद से कुलदीप सेंगर की सजा को लेकर असमंजस था।
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कोर्ट के फैसले के बाद कुलदीप सिंह सेंगर के घर पर पसरा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
लोग कयास लगा रहे थे कि दस से बीस साल की सजा होगी। लेकिन शुक्रवार को आए फैसले में न्यायालय ने कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सुनाई तो कयासों पर विराम लग गया है। कुलदीप और पीड़िता का गांव एक ही होने से पुलिस ने कई बार गश्त की। वहीं पीड़िता और उसके वकील के घर पर तैनात सीआरपीएफ भी मुस्तैद है।
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गांव में तैनात पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
गांव की चौपाल में रौनक की उम्मीद टूटी
नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी कुलदीप सेंगर जब से गांव पहली बार 1996 में ग्राम प्रधान बने थे। इसके बाद से वह गांव रविवार व अन्य छुट्टी के दिन चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते थें। अप्रैल 2018 को उनके जेल जाने के बाद से गांव में उनके घर के परिसर की यह चौपाल वीरान थी।
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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता
- फोटो : अमर उजाला
उनके परिवार और समर्थकों को उम्मीद थी कि न्यायालय में सुनवाई के बाद कुलदीप निर्दोष साबित होंगे और गांव की चौपाल की वीरान चौपाल में फिर रौनक आएगी। लेकिन शुक्रवार को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद परिवार की यह उम्मीद भी टूट गई।
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कुलदीप सिंह सेंगर
भीड़ से खचाखच रहने वाले शहर के आवास में भी सन्नाटा
बांगरमऊ से कुलदीप सेंगर सुबह और शाम शहर में सिविल लाइंस स्थित अपने आवास में भी लोगों से मिलते थे। जहां हर समय भीड़ रहती थी। वहां आज सन्नाटा छाया है। समर्थकों ने भी दूरी बना ली है।
उन्नाव जिला पंचायत में छाया सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
जिला पंचायत कार्यालय में भी खामोशी
उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद कुलदीप सेंगर की पत्नी व जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर के कार्यालय में भी हर तरफ खामोशी छा गई। दोपहर बाद जैसे ही न्यायालय के फैसले की जानकारी हुई, जिला पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी भी सकते में आ गए। सभी के चेहरे पर उदासी नजर आई। हालांकि यहां भी लोग कोई भी प्रतिक्रिया देने से बचते रहे।