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इससे पहले मोबाइल-कंप्यूटर की गिरफ्त छीन ले आपकी आंखों की नमी, पढ़ें क्या हैं इससे बचने के उपाय

Sun, 04 Nov 2018 08:36 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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आंखें - फोटो : अमर उजाला
आंख...शरीर का एक ऐसा अभिन्न अंग जिस पर कवियों, साहित्यकारों और प्रेमियों आदि ने अपने दिल की बात को एक विशेष अंदाज में लोगों के सामने रखा। एक क्षण के लिए आंखों के न होने का अहसास प्राणी के शरीर से मानो सब कुछ छीन लेता है। प्राणी के शरीर के हर एक अंग की अपनी विशेषता है जिसे नकारा नहीं जा सकता, लेकिन आंखों के अभाव में (न दिखाई देने की स्थिति में) ऐसा लगता है मानो सब कुछ होकर भी कुछ नहीं है। इसलिए ईश्वर द्वारा बनाई गई इस सृष्टि को देखने जानने के लिए आपको अपनी आंखों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आगे की स्लाइड में जानिए एक मिनट में 12 बार पलकें झपकाने का फंडा ...


 
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डेमो पिक
कंप्यूटर और मोबाइल फोन की स्क्रीन पर घंटों निगाह जमाए रहने के कारण 10-12 साल की उम्र के बच्चों को आंखों के आंसू सूखने का रोग 'ड्राई आई' हो रहा है। सीतापुर रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑफ्थेलमोलोजी के प्रोफेसर डॉ. बीके पाल ने बताया कि निम्न-मध्य और मध्य वर्ग में ड्राई आई तेजी से बढ़ा है। ड्राई आई वैसे बड़ी उम्र के लोगों का रोग रहा है, लेकिन मोबाइल गेम के चक्कर में किशोर इसकी गिरफ्त में हैं।
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आंखें - फोटो : अमर उजाला
उन्होेंने कहा कि ड्राई आई से बचने के लिए एक मिनट में 12 बार पलकें झपकानी चाहिए। इसके साथ ही हर घंटे में आंखों को 10 मिनट का गैप देना चाहिए।


 

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डेमो पिक
कानपुर मेडिकल कालेज में आयोजित यूपी स्टेट ऑफ्थेमोलोजीकल सोसाइटी की कॉंफ्रेंस में शनिवार को डॉ. पाल शिरकत करने आए थे। उन्होंने बताया कि ड्राई आई की वजह से कार्निया पर प्रभाव आता है। बराबर पलकें झपकाते रहने से पुतली पर नमी बनी रहती है।
 
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डेमो पिक
आंखें लगातार खुली रखने से इसकी नमी उड़ जाती है। पुतली में दिक्कत आने लगती है। ड्राई आई का रोगी थका हुआ सा महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि लोग कंप्यूटर और मोबाइल फोन की स्क्रीन अपलक न देखें। आधा-एक घंटे पर आंखें बंद करके रेस्ट कर सकते हैं।
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