फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कभी हुआ करता था 'अफीम का गोदाम', जानिए इस शहर में इलाकों के अजीब नामों के कारण

Tue, 04 Sep 2018 08:03 PM IST
प्रतीक मिश्रा, कानपुर
विज्ञापन
1 of 11
कानपुर
भारत का मैनचेस्टर कहा जाने वाला कानपुर शहर वैसे तो अपने उद्योग धंधों की वजह से मशहूर है लेकिन यहां कई ऐसे स्थान हैं जिनके नाम बहुत ही अजीब-ओ-गरीब हैं। इन मोहल्लों में अफीम कोठी, सीसामऊ, परेड, नवाबगंज, बेकनगंज आदि लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि इन जगहों के ऐसे नाम क्यों हैं? इनके पीछे की कहानी क्या है? आज हम आपको बताएंगे कि कानपुर की इन जगहों के ऐसे नाम क्यों हैं...

आगे की स्लाइड में पढ़ें- यहां अंग्रेज किया करते थे परेड...

 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 11
परेड चौराहा
कानपुर के जिस इलाके को आज हम परेड के नाम से जानते हैं वहां अंग्रेजी शासन के दौरान अंग्रेज परेड किया करते थे। यही कारण है कि इस जगह का नाम परेड पड़ गया।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- क्यों कहते हैं राम नारायण बाजार...
 
विज्ञापन

3 of 11
राम नारायण बाजार
राम नारायण बाजार का नाम मुंशी राम नारायण खत्री की याद में रखा गया था। राम नारायण ईस्ट इंडिया कम्पनी की फौज में थे।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- हूलागंज के बारे में...
 

4 of 11
कानपुर
कानपुर के वर्तमान हूलागंज का नाम सर हू हवीलर की स्मृति में रखा गया। पहले इस जगह का नाम वीलर गंज पड़ा लेकिन फिर वीर सेनापति हुलास सिंह उर्फ हूलावर सिंह की स्मृति को अमर रखने की भावना से इस जगह का नाम हूलागंज रखा गया।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- बेरी के बागीचों से पड़ा ये नाम...

 
विज्ञापन

5 of 11
बिरहाना रोड
बिरहाना रोड को पहले बेरिहाना के नाम से जाना जाता था क्योंकि यहां बेरी के बहुत से पेड़ हुआ करते थे। जिसमे ठाकुर गजराज सिंह की जमीदारी हुआ करती थी, बाद में यह जगह बिरहाना रोड के नाम से मशहूर हो गई।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- यहां बनाई जाती थी खजूर की चटाई...
 
विज्ञापन

6 of 11
कानपुर
कानपुर के दो मौहल्ले चटाई मोहाल और सिरकी मोहाल के नाम से मशहूर हैं। दरअसल चटाई मोहाल में पहले खजूर की चटाई और सिरकी मोहाल में सिरकी के पाल बनाए जाते थे। इसलिए इस जगह का नाम चटाई मोहाल और सिरकी मोहाल रखा गया।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- कोतवालेश्वर महादेव मंदिर से पड़ा ये नाम...
 
विज्ञापन

7 of 11
कानपुर कोतवाली
साल 1857 में कोतवाली उस जगह पर था जहां लाला कुंजी लाल का मंदिर है। इसके पास ही कोतवालेश्वर महादेव का पुराना मंदिर है बाद में इस जगह का नाम कोतवाली पड़ गया।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- यहां था गोदामों का बाजार...
 

8 of 11
थाना नवाबगंज कानपुर
कानपुर कोहना के पास ज्योरा एक छोटा सा इलाका था, नवाब आसिफुद्दौला और जीरो मुमालिक अवध ने ज्योरा की जमीन पर गंज आबाद किया तभी से यह जगह नवाबगंज यानी गोदामों का बाजार कहा जाने लगा।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- मैजिस्ट्रेट के नाम पर है ये जगह...
 

9 of 11
बेकनगंज कानपुर
स्थानीय लोग बताते हैं कि साल 1828 में कानपुर के मैजिस्ट्रेट विलियम बेकन के नाम पर इस इलाके का नाम बेकनगंज पड़ा।

आगे की स्लाइड में पढ़ेें- ससइमइ से पड़ा ये नाम...
 

10 of 11
सीसामऊ बाजार
गोविंद चंद के अभिलेख से पता चलता है कि सीसामऊ को पहले ससइमइ कहा जाता था जो बाद में सीसामऊ हो गया।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- यहां था अफीम का गोदाम...
 
विज्ञापन

11 of 11
अफीमकोठी चौराहा कानपुर
कानपुर में एक ऐसी जगह भी है जहां एक जमाने में अफीम का गोदाम हुआ करता था इसलिए इस जगह को अफीम कोठी कहा जाने लगा।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें