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'छोड़िए झिझक तोड़िए चुप्पी', मासिक धर्म पर खुलकर बोलें, इन बातों का जरूर ख्याल रखें

Sun, 12 Aug 2018 11:30 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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परिवार के हर व्यक्ति का ख्याल रखने वाली महिलाओं को खुद के भी स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। मौजूदा सामाजिक व्यवस्था में महिलाएं खुद को हर क्षेत्र में सफल साबित कर रही हैं। हालांकि अभी भी कई मुद्दों पर वे खुलकर बोलने में झिझकती हैं। यह झिझक उन्हें छोड़नी होगी और आगे बढ़ना होगा।आयुध निर्माणियां शिक्षण संस्थान (ओएफआईएल) अर्मापुर में शनिवार को महिला सशक्तीकरण पर आयोजित कार्यशाला में यह बातें महिला वक्ताओं ने कहीं। जानिए कुछ बेहद जरूरी बातें...
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प्रजेंटेशन से महिलाओं को स्वस्थ रहने के टिप्स दिए गए। इस मौके पर कई महिलाओं का चेकअप भी किया गया। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मृति मिश्रा ने कहा कि अब मासिक धर्म पर खुल कर बात करने की जरूरत है। तमाम युवतियां और छात्राएं आज भी काफी संकोच करती हैं और परेशान रहती हैं। यदि किसी को भी 16 वर्ष की आयु से मासिक धर्म नहीं हो रहा है तो यह एक बीमारी भी हो सकती है। समय से इलाज कराकर इससे बचा जा सकता है।
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डॉ. रिशु श्रीवास्तव ने कहा कि मासिक धर्म और रजोनिवृत्ति के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। ओएफआईएल की अपर महाप्रबंधक अनुपमा त्रिपाठी ने महिला सशक्तीकरण के लिए महिलाओं का स्वस्थ होना जरूरी बताया। वरिष्ठ शासकीय अधिवक्ता सरला गुप्ता ने कहा कि महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों को रोकने के लिए सख्त कानून आ रहे हैं। जहां भी किसी महिला से किसी भी प्रकार का उत्पीड़न हो तो उसका खुलकर विरोध करें।
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साहित्यकार कमल मुसद्दी ने कहा कि महिलाओं को सबल बनकर आगे बढ़ना होगा। अर्मापुर पीजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गायत्री सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है। इससे पूर्व ओएफआईएल के प्रधान निदेशक मुशर्रफ अली ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान कुछ महिला संगठनों की ओर से छात्राओं-युवतियों को सेनेटरी पैड और आयरन की गोलियां बांटी गईं।
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