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Kidney Racket: गाजियाबाद-दिल्ली के नामी अस्पताल से भी जुड़े तार, शिवम के फोन में रिकॉर्डिंग; किडनी डोनर ग्रुप

Sat, 04 Apr 2026 03:33 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

गाजियाबाद और दिल्ली के अस्पतालों से भी किडनी रैकेट के तार जुड़े हैं। अब पुलिस गाजियाबाद के वैशाली और दिल्ली के द्वारका स्थित हॉस्पिटल से और जानकारी जुटा रही है। पुलिस को आरोपी शिवम अग्रवाल के मोबाइल से रिकॉर्डिंग मिली है।
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Kidney Racket - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
अवैध तरीके से कानपुर में हुए किडनी ट्रांसप्लांट के आरोपियों के तार गाजियाबाद और दिल्ली के नामी अस्पतालों से जुड़ रहे हैं। मामले में आरोपी डॉ. रोहित की मुलाकात ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव, राजेश कुमार और मुदस्सर अली सिद्दीकी से यहीं हुई थी। 

यह खुलासा ओटी टेक्नीशियन से पुलिस पूछताछ में हुआ है। पुलिस गाजियाबाद के वैशाली और दिल्ली के द्वारका स्थित हॉस्पिटल से और जानकारी जुटा रही है। मामले में गाजियाबाद के कई निजी अस्पताल प्रबंधनों में भी हड़कंप है।
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आरोपी शिवम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद डोनर और रिसीवर (किडनी देने व लेने वाले) को कुछ दिन शहर में रखा जाता था। दोनों में किसी की हालत बिगड़ जाती थी तो उन्हें लखनऊ के एक बड़े नर्सिंगहोम या सीधे दिल्ली व गाजियाबाद के बड़े नर्सिंगहोम में भेज दिया जाता था। 

 
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हैलट के सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल से किडनी के मरीज पारूल, आयुष को पीजीआई लखनऊ लेकर जाती एंबुलेंस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके लिए फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया जाता था। मसवानपुर के मेडिलाइफ हॉस्पिटल में दिसंबर 2025 को ट्रांसप्लांट कराने वाली महिला को दिल्ली के अस्पताल में रेफर किया गया था। वहां उसका पर्चा गालब्लाडर के ऑपरेशन के नाम पर बना था।

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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शिवम के मोबाइल में मिली रिकॉर्डिंग
पुलिस को शिवम अग्रवाल के मोबाइल से रिकॉर्डिंग मिली है जिसमें वह किसी से बात कर रहा है। कह रहा है कि दिल्ली के अस्पताल में महिला को भेजा गया है। वहां उसकी मौत हो गई है। घरवाले हंगामा कर रहे हैं। डॉ. रोहित से कहो कि वह मैनेज करें। इस पर कॉल करने वाला कह रहा है कि डॉ. रोहित अभी नहीं हैं। घरवालों को मैनेज किया जा रहा है। पुलिस इस रिकॉर्डिंग के आधार पर और जानकारी जुटा रही है। 
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किडनी ट्रांसप्लांट मामले में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार - फोटो : पुलिस
गाजियाबाद में है रोहित का घर
पुलिस को डॉ. रोहित का आधार कार्ड मिल गया है। यह आधार कार्ड उसने होटल का कमरा बुक करने में लगाया था। उसी आधार कार्ड की बदौलत पुलिस उसके गाजियाबाद में इंद्रापुरम न्यायखंड एक स्थित फ्लैट पहुंच गई। हालांकि, यहां कोई नहीं मिला। कमिश्नरी पुलिस गाजियाबाद और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर आरोपियों की तलाश कर रही है।


 
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किडनी प्रकरण में कानपुर और मेरठ से दो को उठाया
किडनी प्रकरण में पुलिस ने कानपुर और मेरठ से दो को उठाया है जिसमें एक डॉक्टर और दूसरा टेक्नीशियन बताया जा रहा है। दोनों पर डोनर और रिसीवर की सेटिंग कराने का आरोप है। पुलिस की टीमें उनसे पूछताछ कर रही हैं। गुरुवार को हिरासत में लिए गए एनेस्थीसिया के डॉक्टर को छोड़ दिया गया है। उन्होंने केशवपुरम के नर्सिंगहोम में भर्ती एक किडनी रोगी का परीक्षण किया था। उस मरीज की हालत देखकर उन्होंने ट्रांसप्लांट कराने की स्वीकृति नहीं दी थी। अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले आरोपियों का नेटवर्क कानपुर से लेकर दिल्ली और अन्य शहरों तक फैला हुआ है। 
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Kidney Racket - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
एक डॉक्टर और एक टेक्नीशियन बताया जा रहा
इसमें डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ के शामिल होने की संभावना है। पुलिस जांच कर आरोपियों की तलाश कर रही है। शुक्रवार को कानपुर और मेरठ से दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनके खिलाफ किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर और रिसीवर जुटाने का आरोप है।

 

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मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पारुल की जांच करते मैडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डोनर और रिसीवर की सेटिंग कराने का आरोप
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने आरोपियों के एनसीआर क्षेत्र में होने की संभावना पर दो और टीमें रवाना कर दी हैं। अब तक इस मामले में दस टीमें लगी हुई थीं। डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट मामले की जांच में कई लोगों के नाम आ रहे हैं। व्हाट्सएप ग्रुप और टेलीग्राम ग्रुप में कई लोगों के नाम सामने आए हैं। उनकी जांच कराई जा रही है। आरोपियों से पूछताछ हो रही है।

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डॉ. प्रीति आहूजा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किडनी डोनर ग्रुप से जुड़े कई सदस्य रडार पर
अवैध तरीके से चल रहे किडनी ट्रांसप्लांट के खेल में पुलिस को किडनी डोनर ग्रुप की जानकारी मिली है। इसमें 500 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। उनके बीच डोनर, रिसीवर लाने और उन्हें भर्ती कराने की डिटेल है। पुलिस आरोपियों की और जानकारी जुटा रही है जिसके लिए साइबर क्राइम ब्रांच और पश्चिम जोन की साइबर सेल की मदद ली जा रही है।

 

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जेल गए शिवम अग्रवाल के मोबाइल में मिला किडनी डोनर ग्रुप
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि जेल भेजे गए आठ आरोपियों के मोबाइल में व्हाट्स एप, टेलीग्राम और सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की गई। शिवम और किडनी डोनर आयुष के मोबाइल में टेलीग्राम पर किडनी डोनर ग्रुप मिला है। इसके सदस्यों के बीच किडनी ट्रांसप्लांट, अस्पताल भेजने, जांच कराने आदि को लेकर आपसी संवाद हैं। इसी में कुछ सदस्य छोटे छोटे टास्क देकर लोगों को रुपये कमाने का लालच देते हैं।

 

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प्रिया हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
साइबर क्राइम ब्रांच व पश्चिम जोन की साइबर सेल कर ही जांच
शुरू में आयुष को 500 से दो हजार रुपये तक मिले। उसने ग्रुप पर लिखा कि उसे पांच लाख रुपये की आवश्यकता है जिस पर उसे अन्य ग्रुप लाइव किडनी में जोड़ लिया गया। इस ग्रुप में उससे किडनी डोनेट करने का प्रस्ताव दिया गया। उसकी सहमति मिलने पर सहमति पत्र देने को कहा गया। डीसीपी के मुताबिक आयुष की जांच हुई और उसे मेरठ के अल्फा अस्पताल में भर्ती किया गया। उसकी ब्लड और अन्य जांचें हुईं। सब कुछ सही मिलने पर सौदा हुआ। पुलिस ग्रुप से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।

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आहूजा हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसबीआई के पैनल से बाहर हुई डॉ. प्रीति आहूजा
किडनी रैकेट में गिरफ्तार आईएमए उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति को एसबीआई ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। एसबीआई के विशेष मेडिकल पैनल में शामिल डॉ. प्रीति कई साल से एसबीआई से अस्थायी रूप से जुड़ी थी। प्रीति पर प्रबंधन ने अपने अधिकारियों व कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच की जिम्मेदारी दे रखी थी। समय-समय पर बैंक की ओर से आयोजित स्वास्थ्य कार्यक्रमों का जिम्मा भी प्रीति पर था। 

 
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हैलट में किडनी डोनर आयुष चौधरी की जांच करते प्राचार्य डॉ. काला और अन्य - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मामले में एसबीआई अधिकारियों का कहना है कि पार्ट टाइम रूप से जुड़ी डॉ. प्रीति का किडनी कांड में नाम आने से बैंक प्रबंधन हैरान है। उससे किसी भी तरह का कोई सरोकार बैंक नहीं चाहता, ऐसे में उसे बैंक से पूरी तरह अलग करने का निर्णय लिया गया है। बैंक की ओर से प्रीति को हर माह अच्छा वेतन भी दिया जाता था। मामले में बैंक के डीजीएम रजनीश कुमार से संपर्क करने के भी बात नहीं हो सकी।
 
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