कानपुर: पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के जन्मदिन के मौके पर सामाजिक संस्था ‘आपके दोस्त’ के बैनर तले कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। कवियों और शायरों ने अपना कलाम पेश करके खूब वाहवाही और तालियां बटोरीं।
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सामाजिक संस्था ‘आपके दोस्त’ के बैनर तले कवि सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
इस मौके पर शायर मुनव्वर राना का शेर-‘मैं आखिरी गवाह चमन के दिनों का था, तुम ये समझ रहे हो कांटा निकल गया’, श्रोताओं को खूब भाया। वहीं हास्य कवि अखिलेश इलाहाबादी के गंभीर, तीखे और चुटीले व्यंग्य ने लोगों को खूब हंसाया और सोचने पर मजबूर किया।
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सामाजिक संस्था ‘आपके दोस्त’ के बैनर तले कवि सम्मेलन
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कार्यक्रम का आयोजन केके गर्ल्स इंटर कालेज, किदवई नगर में किया। कार्यक्रम में शायरा अंजुम रहबर का कलाम सुनकर श्रोताओं ने खूब वाह-वाह की। उनका शेर ‘मेरी पसंद और थी और सब की पसंद और, इतनी जरा सी बात पर घर छोड़ना पड़ा।’
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सामाजिक संस्था ‘आपके दोस्त’ के बैनर तले कवि सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
अखिलेश इलाहाबादी ने अपनी कविता सुनाई, ‘नारी के चक्कर में यदि पड़ जाओगे बाबाजी, तय है एक दिन बिना भाव के जाओगे बाबाजी।’ युवा शायर आदिल रशीद ने अपना कलाम पेश किया-‘बेवफा हम ही हैं एलान किए देते हैं, चल तेरे काम को आसान किए देते हैं।’
सामाजिक संस्था ‘आपके दोस्त’ के बैनर तले कवि सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
इस मौके पर कवि हेमंत पांडेय, शबाना नूर, संपत सरल, रामेंद्र त्रिपाठी, डॉ. अंसार कंबरी आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के पहले गोपाल दास नीरज की याद में दो मिनट का मौन रखा गया। संचालन शिव ओम अंबर ने किया। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, डॉ. शैलेंद्र दीक्षित, रिजवान हामिद, अब्दुल सलाम जाफरी, मदन मोहन शुक्ला, पवन गुप्ता, शरद गुप्ता आदि रहे।