बच्चा हाें बड़ा हाे या काेई बूड़ा जाे भी उसे देखता था हंसने के लिए मजबूर हाे जाता था। हम बात कर रहे हैं चिड़ियाघर में दर्शकों को रिझाने वाला भालू गब्बर की जाे अब इस दुनिया में नहीं रहा। कैंसर से ग्रसित गब्बर की रविवार दोपहर को मौत हो गई। दो अक्तूबर से उसका इलाज चल रहा था। उसके शरीर में पांच किलो का ट्यूमर भी था।
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नहीं रहा चिड़ियाघर का ‘गब्बर’
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पिंजड़े में बंद भालू
गब्बर को 16 साल पहले झांसी से यहां लाया गया था। चिड़ियाघर मेें अब दो देशी और पांच हिमालयन भालू बचे हैं। चिड़ियाघर में तीन देशी भालू थे लेकिन गब्बर के नटखट अंदाज और उछलकूद की वजह से अलग पहचान थी। 2001 में झांसी से चार भालू के बच्चे पकड़कर लाए गए थे।
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दो अक्तूबर से चल रहा था इलाज,15 साल पहले झांसी से आया था
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अाराम फरमाते हुए गब्बर
उनमें से गब्बर भी एक था। कुछ दिन के लिए सभी को आगरा के आगरा चिड़ियाघर भेज दिया गया। फिर गब्बर को कानपुर लाया गया। तब वह तीन महीने का था। शुरू में वह खुला घूमता था, पांच महीने का होने के बाद उसे पिंजरे में रखा गया।
करीब चार महीने पहले पता चला कि गब्बर को कैंसर है और वह लीवर की बीमारी से भी जूझ रहा है। डॉ. आरके सिंह, डॉ. नासिर और डॉ. यूसी श्रीवास्तव के पैनल ने उसका इलाज शुरू किया। हालांकि उसे बचाया नहीं जा सका। वीडियोग्राफी के बाद कब्रिस्तान में उसका अंतिम संस्कार किया गया।