कानपुर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में 20 दिसंबर को हुई बाबूपुरवा हिंसा में घायल हुए दस आरोपी इलाज के बाद शहर छोड़कर फरार हो गए। पुलिस आरोपियों की निगरानी करने में फेल साबित हुई। कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।
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नागरिकता कानून पर कानपुर में भड़की हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
हिंसा के दौरान गोली लगने से मोहम्मद फैज, शान मोहम्मद, कामिल, अली मोहम्मद, मोहम्मद अकील, मोहम्मद जमील, मोहम्मद कासिम, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद फैजान और मोहम्मद आवेश घायल हो गए थे। मोहम्मद सैफ, आफताब आलम और रईस खान की मौत हो गई थी।
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कानपुर में हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
हैलट में इलाज बाद एफआईआर होने की जानकारी के बाद दसों लोग शहर छोड़कर फरार हो गए। पुलिस को भनक नहीं लगी। डीआईजी अनंत देव तिवारी के मुताबिक पुलिस पर पथराव, फायरिंग और बमबाजी में सभी शामिल रहे थे। इनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।
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कानपुर में हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
नुकसान की भरपाई को दोबारा भेजा नोटिस
हिंसा के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए परवेज आलम, शहजाद आलम उर्फ सरफराज आलम, आदिल, मुस्तकीम, शहरूज्जमा, अकरम, हाफिज शकील, शाह मोहम्मद, शाविर चूड़ी वाला, मोहम्मद कासीम, फैजान खान, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद फैज, मोहम्मद आवेश, मोहम्मद जमील, मोहम्मद अकील, शान मोहम्मद को दोबारा नोटिस जारी किया। मामले की जांच कर रहे बाबूपुरवा इंस्पेक्टर ने बताया कि सभी का पक्ष सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कानपुर में हिंसा फैलाने वाले उपद्रवियों की तस्वीरें
- फोटो : अमर उजाला
बाबूपुरवा हिंसा : एडीजी कानून व्यवस्था ने डीआईजी से मांगी रिपोर्ट
सीएए के विरोध में हिंसा में हुई मौतों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिकाओं पर 16 फरवरी को सुनवाई होनी है। इसके मद्देनजर एडीजी कानून व्यवस्था पीबी रामा शास्त्री ने डीआईजी अनंत देव को लखनऊ तलब कर तीन प्रदर्शनकारियों की मौत, घायलों, उपद्रवियों की गिरफ्तार और फरार आरोपियों समेत मुकदमों से जुड़ी अन्य जानकारियां लेकर रिपोर्ट मांगी। मालूम हो कि बाबूपुरवा हिंसा में दो जनहित याचिकाएं हाईकोर्ट इलाहाबाद व लखनऊ खंडपीठ में दाखिल हुई थीं। लखनऊ खंडपीठ में एसआईटी अपना जवाब दाखिल कर चुकी है। 16 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करना है।