कानपुर के बर्रा में हुए संजीत अपहरण कांड के आरोपी रामजी शुक्ला की रिमांड सीएमएम कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दी है। रामजी की गिरफ्तारी के बाद कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के चलते रिमांड पर लेने का समय निकल गया। इसलिए कोर्ट ने रिमांड पर लेने के लिए बर्रा पुलिस की ओर से दाखिल की गई अर्जी को खारिज कर दिया है।
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Kanpur Kidnapping Case
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के कानपुर में 22 जनू को हुए लैब टेक्नीशियन संजीत यादव के अपहरण और उसके बाद हत्या किए जाने के मामले में पुलिस हर कदम पर फेल रही है। अपहरण कांड के लगभग एक माह बाद पुलिस ने 21 जुलाई को संजीत के दो दोस्तों को पकड़कर खुलासा किया था लेकिन पुलिस अभी तक पांडु नदी से संजीत का शव बरामद कर सकी है।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
न ही आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत जुटा सकी है। अब कोर्ट से भी पुलिस को झटका लगा है। कोर्ट ने मुख्य आरोपी को रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। लेकिन कोर्ट ने यह कहकर अर्जी ठुकरा दी कि इस प्रक्रिया की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। लैब टेक्नीशियन संजीत यादव का 22 जून को अपहरण हुआ था। 29 जून को उसके परिवार वालों के पास फिरौती के लिए फोन आया।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
30 लाख रुपए फिरौती मांगी गई की थी। परिवार वालों ने पुलिस की मौजूदगी में 30 लाख की फिरौती दी थी। लेकिन न तो पुलिस अपहरणकर्ताओं को पकड़ पाई न संजीत यादव को बरामद किया गया। 21 जुलाई को जब पुलिस ने सर्विलांस की मदद से संजीत के दो दोस्तों को पकड़ा तो पता चला कि उन लोगों ने संजीत की 26 जून को ही हत्या कर दी गई थी। शव को पांडु नदी में फेंक दिया था।
इसके बाद सीएम योगी के निर्देश पर इस मामले में एक आईपीएस समेत 11 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। पुलिस ने पांडु नदी में कई बार लगातार सर्च अभियान चलाया, लेकिन संजीत का शव हाथ नहीं लगा। वहीं, आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में मजबूत साक्ष्य के आधार पर मुकदमा लड़ने की तैयारी कर रही पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। अपहरणकर्ताओं ने संजीत यादव को जिस कमरे में रखा था, वहां भी फॉरेंसिक टीम ने पड़ताल की थी लेकिन मायूसी हाथ लगी थी।