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UP: भंडरिया के 43 मिनट…कुशाग्र-प्रभात के बीच हुआ था संघर्ष, कोई चश्मदीद गवाह नहीं…CCTV और CDR ने किया पर्दाफाश

Fri, 23 Jan 2026 05:49 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur Kushagra Murder Case: कुशाग्र हत्याकांड में सीसीटीवी फुटेज और सीडीआर सबसे अहम कड़ी साबित हुए। फुटेज ने साढ़े चार बजे से सवा पांच बजे के बीच हत्या की पुष्टि की, जबकि कॉल रिकॉर्ड्स ने साबित किया कि रचिता, प्रभात और शिवा लगातार संपर्क में थे और हत्या की योजना पहले ही तैयार कर ली गई थी।
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Kushagra Murder case - फोटो : amar ujala
छोटी सी भंडरिया के अंदर 43 मिनट तक प्रभात और कुशाग्र के बीच जो हुआ वो किसी ने नहीं देखा। कुशाग्र की हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था, लेकिन घटना के खुलासे और दोषियों को सजा तक पहुंचाने में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने अहम भूमिका निभाई। सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिपोर्ट का बारीकी से परीक्षण करने पर रचिता, प्रभात और शिवा के घटना में शामिल होने के अभियोजन के तर्क पर कोर्ट ने सहमति जताई।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान पांच घंटे तक कोर्ट रूम में एक-एक सीसीटीवी फुटेज को बारीकी से देखा गया था। फुटेज में प्रभात और कुशाग्र शाम 4:33 बजे भंडरिया के अंदर जाते हैं और 5:16 मिनट पर प्रभात अकेला भंडरिया से हेलमेट लेकर बाहर निकलता है।
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Kushagra Murder Case - फोटो : amar ujala
इसी 43 मिनट के दौरान प्रभात ने रस्सी से गला घोंटकर कुशाग्र की हत्या कर दी। जान बचाने और जान लेने के लिए कुशाग्र और प्रभात के बीच चली जद्दोजहद तो भंडरिया की दीवारों में ही कैद होकर रह गईं, लेकिन पास के हाते में लगे सीसीटीवी कैमरों में प्रभात की हरकतें कैद हो गईं थी। 6:02 मिनट पर रचिता के प्रभात के घर से बाहर निकलते और एक मिनट बाद हेलमेट लेने के लिए दोबारा प्रभात के घर जाते दिख रही है। प्रभात के घर जाते समय रचिता ने भी भंडरिया को ओर देखा था जो सीसीटीवी की निगाहों से बच नही सका। इसी तरह शिवा घटना के दौरान अपने घर के दरवाजे पर खुद को पर्दे से छिपाते दिखा।
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Kushagra Murder Case - फोटो : amar ujala
15 दिन पहले रचिता और प्रभात कुशाग्र के घर गए थे
फटेज में प्रभात फिरौती का पत्र शिवा को देते भी दिखा। शिवा की गतिविधियां भी कैमरे में कैद हो गई थीं। सभी रिकॉर्डिंग्स ने साफ कर दिया कि कुशाग्र के अपहरण और हत्या में तीनों शामिल थे। सीसीटीवी के अलावा कॉल डिटेल रिपोर्ट से भी कई अहम खुलासे हुए। रचिता और प्रभात में प्रेम संबंध थे, जबकि शिवा और प्रभात अच्छे दोस्त थे। सीडीआर से पता चला कि रचिता और शिवा के बीच कभी कोई बात नहीं हुई, लेकिन रचिता-प्रभात और प्रभात व शिवा लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। रचिता जो सिम इस्तेमाल करती थी, वह भी प्रभात के नाम पर था। घटना से 15 दिन पहले रचिता और प्रभात कुशाग्र के घर गए थे।

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Kushagra Murder Case - फोटो : amar ujala
रचिता और प्रभात में लगभग 10-12 बार बात हुई
मां सोनिया के इसी बयान के आधार पर अभियोजन ने 14, 15 और 16 अक्टूबर की भी सीडीआर मंगवाई थी। इससे पता चला कि प्रभात और शिवा के बीच छह-सात बार बात हुई जबकि प्रभात और शिवा एक ही हाते में रहते थे। घटना वाले दिन 30 अक्टूबर को लगभग सवा नौ बजे जब शिवा पत्र डालने गया। उस आधे घंटे के दौरान रचिता और प्रभात के बीच छह-सात बार बात हुई। फिरौती का पत्र मिलने पर जब कुशाग्र की मां ने रचिता को फोन कर स्कूटी के बारे में पूछा, तो उसने स्कूटी घर पर ही होने की बात कही। जब तक कुशाग्र के परिजन रचिता के घर पहुंचे इस बीच रचिता और प्रभात में लगभग 10-12 बार बात हुई।
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जानकारी देते कुशाग्र के चाचा - फोटो : amar ujala
चाचा सुमित ने पहचानी सीसीटीवी की 25 फोटोग्राफ्स
कोर्ट में प्रभात और कुशाग्र के घर के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से रचिता के स्कूटी से चलने वाली फोटो, कुशाग्र व प्रभात की एक साथ की फोटो दाखिल की गईं थी। गवाही के दौरान कुशाग्र के चाचा सुमित कनोडिया ने इन 25 फोटो को पहचाना था। सुमित ने गवाही के दौरान बताया था कि उसने रचिता को यह कहते सुना और देखा था कि हम तीनों से बहुत बड़ी गलती हो गई है। पैसों के लालच में कुशाग्र का अपहरण कर हत्या कर दी है। सुमित ने बताया था कि सीसीटीवी फुटेज में प्रभात और कुशाग्र दोनों भंडरिया के अंदर जाते दिखे। दरवाजा बंद हो गया लेकिन लगभग आधे घंटे बाद सिर्फ प्रभात बाहर निकला कुशाग्र नहीं। प्रभात लिफाफे में फिरौती का पत्र डालते, शिवा से बातचीत करते, शिवा अपने घर से निगरानी करते और रचिता व प्रभात साथ-साथ जाते दिखाई दिए थे। चार पेन ड्राइव में स्टोर की गईं सभी फुटेज को कोर्ट में भी देखा गया था।
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कुशाग्र की मां को ढांढस बंधाते पिता मनीष कनोडिया - फोटो : अमर उजाला
एफएसएल रिपोर्ट से हुई प्रभात की लिखावट की पुष्टि
फिरौती के लिए भेजे गए पत्र की लिखावट और प्रभात शुक्ला की लिखावट का मिलान विधि विज्ञान प्रयोगशाला झांसी की रिपोर्ट में हो गया था। जिस कलम से फिरौती का पत्र लिखा गया था पुलिस ने उसे बरामद कर लिया था। उसी कलम से प्रभात से पत्र लिखवाकर एफएसएल जांच के लिए भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में साफ हो गया है कि दोनों लिखावट एक ही हैं और दोनों पत्र भी एक ही कलम से लिखे गए हैं। पुलिस ने वह रजिस्टर भी बरामद कर लिया था जिससे पेज फाड़कर फिरौती के लिए पत्र लिखा गया था। इसकी पुष्टि भी एफएसएल रिपोर्ट में हुई थी। स्कूटी के नंबर में छेड़छाड़ किए जाने की बात भी रिपोर्ट में साफ हुई थी।
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फैसला आने के बाद रोती कुशाग्र की मां - फोटो : amar ujala
चचेरे बाबा ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
कुशाग्र के पिता मनीष कनोडिया सूरत में व्यापार करते हैं। कुशाग्र के कोचिंग से घर न लौटने पर मां सोनिया ने मनीष को सूचना दी तो मनीष ने कानपुर में रहने वाले अपने चाचा संजय कनोडिया को घर जाने के लिए कहा था। संजय ने घर पहुंचकर कुशाग्र की मां सोनिया से जानकारी ली। मनीष ने मोबाइल की लोकेशन जरीब चौकी बताई तो संजय ढूंढते हुए वहां पहुंचे लेकिन पता न चलने पर पुलिस को सूचना दी। उसी दौरान सोनिया ने फोन से फिरौती के पत्र के बारे में बताया जिसके बाद पुलिस भगवती विला पहुंची और सोनिया व चौकीदार से पूछताछ की। तब तक लखनऊ में रहने वाले मनीष के भाई सुमित भी आ गए थे। इसके बाद सभी रचिता के घर पहुंचे और फिर पुलिस हत्यारों तक पहुंच गई। संजय कनोडिया ने ही घटना की रिपोर्ट रायपुरवा थाने में दर्ज कराई थी।
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