पांडु नदी का जलस्तर काफी हद तक घट जाने से संजीत का शव खोज रही पीएसी व गोताखोर टीमों की मुश्किलें और बढ़ गईं। स्टीमर के मिट्टी और कूड़े में फंसने से सर्च ऑपरेशन में बाधा आ रही है। टीम ने नदी में पैदल ही चलकर शव खोजने का प्रयास किया। डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने भी फत्तेपुर गोही के पास पहुंचकर सर्च ऑपरेशन में जुटी टीम को निर्देश दिए। हालांकि, संजीत का शव खोजने में जुटी टीम को छठवें दिन भी कोई कामयाबी नहीं मिली।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : अमर उजाला
वहीं कोर्ट से 48 घंटे की रिमांड मंजूर होने के बाद बुधवार सुबह पुलिस ने पूछताछ के लिए तीनों अपहर्ताओं को जेल से निकालकर कस्टडी में लिया है। जेल से निकालने के बाद पुलिस तीनों को लेकर बर्रा थाने पहुंची। जहां तीनों से अलग-अलग पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने पूछताछ कर रही है।
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फफक पड़ी संजीत की मां
पुलिस की कहानी सुनकर मां कुसुमा देवी फफक पड़ीं। बेटी ने उन्हें सहारा दिया। इस बीच परिजनों के साथ मौजूद भीड़ ने मकान की साफ सफाई करने वाले नौकर मोहित पर अपहर्ताओं से मिलीभगत की आशंका जता कर पीटने का प्रयास किया। किसी तरह उसे बचाया गया। पिता ने कहा जब तक वह बेटे का शव नहीं देख लेते, तब तक उसकी हत्या किए जाने की बात पर भरोसा नहीं करेंगे। उन्होंने विधानसभा के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी है।
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किराये पर मकान लेने को महिला, बच्चों के साथ पहुंचा था
पुलिस की पूछताछ में एसके श्रीवास्तव ने बताया कि सहालग के वक्त जनवासे के लिए मकान को किराये पर उठाते थे। लॉकडाउन के बाद से मकान खाली पड़ा था। ईशु उर्फ ज्ञानेंद्र यादव ने अपने साथ एक महिला प्रीति शर्मा, उसके दो बच्चों और एक वृद्धा को साथ लाया था। इस पर ईशु को 15 जून को 15 हजार रुपये किराये पर मकान दे दिया था। 11 महीने का एग्रीमेंट कराया था।
हालांकि 14 जुलाई को वह मकान खाली कर गया था। पुलिस ने मकान की साफ सफाई करने वाले नौकर उनके मोहित व देबू को पूछताछ के बुलाया था। कमरे से चिप्स, गिलास और कोल्डड्रिंक की खाली बोतलें मिलने के सवाल पर नौकरों का कहना था कि मालिक के न होने के कारण साफ सफाई में खानापूरी की वजह से कुछ सामान अंदर रह गया होगा।