संजीत अपहरण हत्याकांड कांड की जांच सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को हस्तांतरित किए जाने से परिजन संतुष्ट हैं। वहीं पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। आनन-फानन बर्रा पुलिस ने रविवार को ही मामले से संबंधित पूरा ब्यौरा डीआईजी को सौंप दिया है।
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Kanpur Kidnapping Case
- फोटो : अमर उजाला
चर्चा है कि सीबीआई जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा। लापरवाही पुलिसकर्मियों पर गाज गिर सकती है। 22 जून को संजीत के अगवा होने के बाद परिजनों ने तत्कालीन एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता, तत्कालीन सीओ मनोज गुप्ता, तत्कालीन इंस्पेक्टर रणजीत राय, तत्कालीन जनता नगर चौकी प्रभारी राजेश कुमार पर बेटे को खोजने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
29 जून के बाद से लगातार अपहर्ता फिरौती के लिए फोन कर रहे थे। कई-कई मिनट तक अपहर्ताओं की उनसे बातें होती रही, वहीं पुलिस अपनी आंख और कान बंद किए रही।
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बहन की गुहार नहीं सुनी थी
संजीत की बहन रुचि ने बताया कि अपहर्ताओं को फिरौती की रकम 13 जुलाई को देनी थी। इससे दो दिन पहले पूरा परिवार मदद के लिए तत्कालीन एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता के कार्यालय पहुंचा था। उन्होंने छोटी-छोटी बातों के लिए कार्यालय न आने की बात कह कर चलता कर दिया था। रुचि का आरोप है कि पैसों के जाने की आशंका के चलते उसने एसपी साउथ को बैग में चिप लगाने की राय दी थी, लेकिन उन्होंने डांट कर शांत कराया दिया था।
पुलिस ने घर आकर की थी बदसलूकी
चमन सिंह का आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी रणजीत राय ने पूछताछ के लिए थाने बुलाकर बेटी रुचि पर ही अपहर्ताओं के साथ मिलकर भाई का अपहरण कराने का आरोप लगा दिया था। राहुल पर बेटे के अपहरण की आशंका जता कर थाने में तहरीर दी तो तत्कालीन जनता नगर चौकी प्रभारी राजेश कुमार ने घर पर आकर बदसलूकी की थी। परिजनों के मुताबिक अगर समय रहते पुलिस हरकत में आ जाती तो आज उनका बेटा सामने होता। जानकारों का मानना है कि सीबीआई जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर दोषी पुलिस कर्मियों को जेल तक हो सकती है।