संजीत अपहरण हत्याकांड के मास्टरमाइंड कुलदीप ने घटना को लेकर नया खुलासा किया है। पुलिस की पूछताछ में कुलदीप ने बताया कि उन लोगों ने संजीत की हत्या नहीं की थी, बल्कि चाकू से उसने खुद हाथ की नस काट ली थी। अधिक खून बहने से उसकी मौत हो गई।
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kanpur kidnapping case
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इसके बाद उसका शव पांडु नदी में फेंक आए थे। बताया कि किसी को शक न हो, इसलिए भाभी (प्रीति शर्मा) और किसी एक अन्य साथी को संजीत के साथ छोड़कर सभी इधर-उधर हो जाते थे। एक दिन रामजी ने उसे सेब खाने के लिए दिया। संजीत ने सेब काटने के लिए चाकू मांगा। इसी चाकू से उसने खुद पर हमला कर लिया।
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अमीर बनने का लालच देकर ज्ञानेंद्र ने नीलू को गैंग में किया था शामिल
रिमांड पर लिए गए सचेंडी के नीलू ने बताया कि सभी आरोपी जल्द अमीर बनना चाहते थे। इसी चक्कर में दोस्त के ही अपहरण की साजिश रच डाली। कोई गलती न हो इसके लिए कुलदीप और रामजी ने सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी थी। नीलू ने बताया कि वह पेशे से किसान है। ज्ञानेंद्र ने ही उसे पैसों का लालच देकर गैंग में शामिल किया था।
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अय्याशी कराने और सिम दिलाने में नीलू ने की मदद
नीलू ने बताया कि मोहल्ले में रहने वाले उसके दोस्त सिम्मी (फरार आरोपी) ने करीब पांच महीना पहले दबौली वेस्ट निवासी ज्ञानेंद्र से मिलवाया था। ज्ञानेंद्र के विषय में बताया था कि हैलट में नौकरी करता है। पत्नी की डिलीवरी में ज्ञानेंद्र ने उसकी मदद भी की थी। इसके बाद दोनों के बीच दोस्ती बढ़ गई थी। नीलू ने बताया कि वह स्मैक का आदी है। लॉकडाउन में ग्रामीण क्षेत्रों में स्मैक न मिल पाने के कारण ज्ञानेंद्र से संपर्क किया तो उसने रतनलाल नगर स्थित किराये के मकान पर बुलाया। यहां किसी महिला की व्यवस्था करने को कहा तो गुमटी नंबर पांच निवासी प्रीति शर्मा से संपर्क कराया। इसके बाद एक दोस्त से संपर्क कर फर्जी आईडी पर सिम दिलाए। इसके बदले उन्होंने काम होने के बाद दो लाख रुपये देने का वादा किया था।
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पांच सौ में खरीदा था पुराना मोबाइल और तीन सिम
नीलू के अनुसार उसका कानपुर देहात निवासी दोस्त चीता फर्जी आईडी पर सिम और मोबाइल दिलाने का काम करता है। उससे मदद मांगी तो रतनलाल नगर में 500 रुपये का एक पुराना मोबाइल व फर्जी आईडी पर चालू तीन सिम दिए थे। इसी मोबाइल की मदद से सिम्मी, रामजी और कुलदीप फिरौती मांगते थे।
संजीत को महिला का लालच देकर ले गए कमरे में
पूछताछ में ज्ञानेंद्र ने बताया कि नीलू ने प्रीति शर्मा से मुलाकात करा दी थी। वो बुलाने पर रतनलाल नगर कमरे में पहुंच जाती थी। 22 जून को संजीत को भी अय्याशी का लालच देकर देकर ज्ञानेंद्र की कार से कमरे में ले गए थे। यहां उसे चार दिनों तक नशे का इंजेक्शन देकर बेहोशी की हालत में रखा गया।