संजीत अपहरण हत्याकांड मामले में सवालों के घेरे में आई पुलिस पर एक और आरोप लगा है। परिजनों के मुताबिक पुलिस ने अपने खुलासे को पक्का करने के लिए गवाहों की टोली खड़ी कर उनका माइंड वॉश किया। वे सिखाए गए बयान के अलावा कुछ और बोलने को तैयार नहीं हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए कुछ गवाहों से बातचीत की गई। इनकी बयानबाजी सुनने के बाद 2015 में रिलीज अजय देवगन की सस्पेंस थ्रिलर फिल्म दृश्यम याद आ जाती है। इनके बयान और सच्चाई में कोई तालमेल नहीं है।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
महिला की बयानबाजी हकीकत से बेमेल
अपहर्ताओं ने रतनलाल नगर स्थित जिस मकान को 1500 रुपये किराये पर लिया था, उसके पड़ोस में मल्होत्रा परिवार रहता है। रविवार को मीडिया कर्मी जब मौके पर पहुंचे तो पड़ोसी महिला को अंदर बाहर करते देखकर पूछताछ की गई। अमूमन ऐसे मामलों में आस पड़ोस के लोग मुंह छिपाते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
महिला के मुताबिक करीब एक महीने पहले कुछ युवक पड़ोस में रहने आए थे। इनके पास गृहस्थी का सामान नहीं था। युवक फोर्ड कार से देर रात को घर लौटते थे। कार के आगे नंबर प्लेट पर रक्षा मंत्रालय लिखा होने से युवकों के नौकरी पेशा से जुड़े होने की संभावना पर नजर रखना बंद कर दिया।
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हालांकि अक्सर रात में घर से किसी के कराहने की आवाजें आती थीं। कई बार तो किसी महिला से बातचीत की भनक लगी थी। महिला की बयानबाजी से साफ हो रहा था कि उसे यह सब बोलने के लिए सिखाया गया है। इसके बावजूद सच्चाई जानने के लिए थाने में खड़ी कार की जांच पड़ताल की तो पाया कि कार के पीछे वाली नंबर प्लेट पर रक्षा मंत्रालय लिखा है।
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संजीत के पिता ने उठाया सवाल
संजीत के पिता ने पुष्टि की थी कि पुलिस ने जिस कार से संजीत का अपहरण करने की बात कही थी, वह चलने की हालत में ही नहीं थी। पुलिस अपहरण के आरोपी ज्ञानेंद्र के घर से कार को क्रेन की मदद से पहले रतनलाल नगर चौकी लेकर पहुंची। कार स्टार्ट न होने पर दोबारा क्रेन की मदद से उसे बर्रा चौकी पर पहुंचा दिया गया। ऐसे में महिला की ओर से कार के संबंध में दी गई जानकारी हजम नहीं हुई।
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दुकानदार को नोट बेचने की तारीख तक याद
शनिवार को पुलिस की ओर से एक मैसेज वायरल किया गया, जिसमें बर्रा तीन स्थित उस दुकान का पता दिया गया था, जहां से संजीत के परिजनों पर चूरन वाले नकली नोट खरीदने का आरोप लगा था। इस संबंध में दुकानदारों से भी बातचीत की गई। पता चला कि 13 जुलाई को एक 30 से 35 साल का युवक 500 रुपये के चूरन वाले नोट की चार गड्डियां खरीदकर ले गया था। इसके बाद 16 जुलाई को कुछ पुलिस वाले भी सादे कपड़ों में पूछताछ करने आए थे।
दुकानदार के मुताबिक वह सालों से चूरन वाले नोट बेचने का काम कर रहा है। सुबह से शाम तक कई ग्राहक आते हैं। ऐसे में उसी ग्राहक के दुकान में आने तक की तारीख को याद रखना अपने आप में बड़ा सवाल है। आम तौर पर ऐसा नहीं होता है। इन सभी की बयानबाजी दृश्यम फिल्म का सीन याद दिलाती है। इस फिल्म का नायक अजय देवगन अपने आप को बेगुनाह साबित करने के लिए अपने पक्ष में गवाहों की टोली खड़ी कर देता है। संजीत मामले में भी ऐसी ही गवाह तैयार किए गए।