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कानपुर: छलक पड़ा बिकरू गांव को लोगों का दर्द, महिलाएं बोलीं- चौबेपुर थाने में कोई सुनता ही नहीं

Mon, 13 Jul 2020 02:07 PM IST
प्राची प्रियम संवाद न्यूज एजेंसी, बिल्हौर
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बिकरू गांव में जांच करने पहुंची एसआईटी की टीम - फोटो : अमर उजाला
कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में पुलिस और आरएएफ की तैनाती के बाद जैसे-जैसे हालात सामान्य हो रहे हैं वैसे-वैसे ग्रामीणों का दर्द सामने आ रहा है। पुलिस और आरएएफ के अधिकारी ड्यूटी के दौरान ग्रामीणों से विकास दुबे और उसके गुर्गों की जानकारी ले रहे हैं। धीरे-धीरे लोगों का भरोसा भी जाग रहा है और वे पुलिस टीम के साथ जानकारी साझा करते नजर आ रहे हैं।


 
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बिकरू गांव में जांच करने पहुंची एसआईटी की टीम - फोटो : अमर उजाला
विकास दुबे की कोठी के पास रहने वाली महिला सन्नो, देविका, बुजुर्ग राधादेवी और ऊषा ने गांव में तैनात फोर्स को बताया कि उस गांव के लोग वर्ष 2001 में हुए मंत्री संतोष शुक्ला हत्या कांड के बाद से ही पूछताछ के शिकार हैं। उनसे आए दिन किसी न किसी मामले में पूछताछ होती ही रहती है।

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बिकरू गांव में जांच करने पहुंची एसआईटी की टीम - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि चौबेपुर थाने में ग्रामीणों की कोई सुनता ही नहीं है, गांव में 'पंडित जी' की चलती थी। महिलाओं ने कहा कि हम लोग फैक्टरी में मजदूरी  और खेतीबाड़ी का काम कर जैसे-तैसे गुजरबसर कर परिवार का पेट पाल रहे हैं। 

 

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बिकरू गांव में जांच करने पहुंची एसआईटी की टीम - फोटो : अमर उजाला
बीते दो जुलाई की रात की वारदात को याद करते हुए उन्होंने बताया कि घटना के बाद से दहशत तो थी ही, लेकिन पुलिस के रवैये ने उन्हें और डरा दिया था। पुलिस ने जांच के नाम पर कई घरों के दरवाजे और घरों के अंदर के सामान तोड़ डाले। महिलाओं ने कहा कि अब तो जुर्म और अपराध सहना हमारी आदत बन गई है।
 
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बिकरू गांव में जांच करने पहुंची एसआईटी की टीम - फोटो : अमर उजाला
मालूम हो कि कानपुर के चौबेपुर के बिकरू गांव में हुए एनकाउंटर के मामले की जांच एसआईटी (स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम) ने शुरू कर दी है। इसी कड़ी में एसआईटी ने रविवार को बिकरू गांव पहुंचकर ग्रामीणों के बयान लिए थे और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए थे। इसी क्रम टीम को विकास दुबे और उसके कारनामों के काले चिट्ठों के बारे में तमाम बातें पता चल रही हैं।
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