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Vikas Dubey: विकास दुबे का गुर्गा बन समझौता कराने पहुंचा था थानेदार, हथियार छीन बना लिया था बंधक

Mon, 06 Jul 2020 06:39 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
कानपुर एनकाउंटर के बाद चौबेपुर पुलिस का एक और कारनामा सामने आया है। चौबेपुर एसओ विकास से पीड़ित राहुल तिवारी की एफआईआर दर्ज करने के बजाए विकास की पंचायत में समझौता कराने को राहुल तिवारी को लेकर गया था। यहां विकास और उसके गुंडों ने पुलिसकर्मियों के असलहे छीनकर बंधक बना लिया था।

 
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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
उसके बाद राहुल को जमकर पीटा था। जान से मारने की धमकी थी। जब उसने विकास की सारी बातें मान लीं तब उसको छोड़ा गया। राहुल की मां के मुताबिक 27 जुलाई को राहुल शाम को घर लौट रहा था तो विकास और उसके तीन साथियों ने रास्ते में उसको पकड़ लिया और जमकर पीटा। धमकी दी कि अगर जमीन बेचने की सोची तो जान से मार देंगे।



 
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विकास दुबे और मुठभेड़ में पकड़ा गया साथी दयाशंकर - फोटो : amar ujala
राहुल ने पुलिस को तहरीर दी। लेकिन चौबेपुर पुलिस ने सुनवाई नहीं की। जब दोबारा शिकायत की तो मंगलवार को चौबेपुर के तत्कालीन एसओ विनय तिवारी ने कहा कि वो मामले की पंचायत करवा देंगे। एसओ थाने के तीन अन्य पुलिसकर्मियों के साथ राहुल को लेकर विकास के घर पहुंचे। यहां पर विकास के गुंडों ने पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया। 

 

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ग्रामीणों में विकास दुबे खौफ का दूसरा नाम है - फोटो : amar ujala
असलहों के दम पर एक कमरे में बंद कर दिया और राहुल को जमकर पीटा। आखिर में राहुल ने कहा कि वो जैसा कहेंगे वह वैसा ही करेगा। तब उसको पीटना बंद किया। इसके बाद पुलिसकर्मियों व राहुल को छोड़ दिया गया। इस घटना के बारे में उसने और चौबेपुर पुलिस ने किसी को नहीं बताया।

 
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एडीजी एलओ और विकास दुबे एवं हमले में शहीद पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
तब सीओ ने दर्ज कराई थी एफआईआर
राहुल की मां के मुताबिक जब राहुल विकास के घर से लौटा तो उसने पूरी घटना बताई। इसके बाद उसने सीओ बिल्हौर को तहरीर दी। सीओ ने घटना को संज्ञान में लेकर एसएसपी से अनुमति ली और विकास दुबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। उसके कुछ ही घंटे बाद गिरफ्तारी के लिए रवाना हुए थे।

 
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विकास दुबे (काले कोट में) - फोटो : amar ujala
ये है विकास-राहुल का विवाद
जादेपुर धस्स गांव निवासी राहुल तिवारी की ससुराल चौबेपुर के घनश्यामपुर के मजरा मोहिनी निवादा गांव में है। ससुर लल्लन शुक्ला ने अपने भांजे सुनील को गोद लिया था। उसी के नाम आठ बीघा जमीन भी कर दी थी। लल्लन की दो बेटियों की शादी हो चुकी है। एक बेटी प्रतिमा की शादी राहुल से हुई थी।

 
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विकास दुबे के लिए बिकरू गांव - फोटो : amar ujala
लल्लन की मौत के बाद से राहुल ससुराल की जमीन बेचकर साली की शादी करना चाहते हैं। उधर गोद लिए गए सुनील की शादी विकास दुबे की पारिवारिक बहन समीक्षा से हुई है। विकास बहन को जमीन देने के पक्ष में था और वो जमीन राहुल को जमीन बेचने नहीं देना चाहता था। इसी विवाद में राहुल पर जानलेवा हमला किया था।

 

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विकास दुबे का घर - फोटो : amar ujala
राहुल की भूमि राइस मिल मालिक लेना चाहता
चौबेपुर के सूत्रों की माने तो मोहनी निवादा गांव की करीब 8 करोड़ रुपये कीमत की जिस भूमि को जादेपुर घस्सा गांव निवासी राहुल तिवारी बेचना चाहता था उसे खरीदने वाले लोग चौबेपुर बेला रोड के एक गांव के हैं। उनकी क्षेत्र में राइस मिल भी है।

 
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विकास दुबे ने खेला खूनी खेल - फोटो : amar ujala
राइस मिल के लोग जमीन तो लेना चाहते थे, लेकिन सीधे तौर पर विकास दुबे से पंगा लेने की हिम्मत नहीं रखते थे। उन्होंने एसओ चौबेपुर और सीओ बिल्हौर के मध्य रार का फायदा उठाया। चौबेपुर एसओ द्वारा राहुल तिवारी का मुकदमा न लिखने पर राजनैतिक दबाब डलवाकर राहुल को सीओ से मिलवा दिया। जिसके बाद यह परिणाम सामने आया।
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