कानपुर के बिकरू कांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की टीम ने गुरुवार को इटावा पहुंचकर जांच की। टीम ने पुलिस अधिकारियों के साथ बिकरू कांड में शामिल प्रवीण दुबे उर्फ बऊआ एनकाउंटर स्पॉट का जायजा लिया। इस दौरान टीम ने एनकाउंटर में शामिल क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस से पूछताछ करते हुए पूछा कि बदमाशों की कैसे मिली जानकारी, कैसे घेराबंदी की, फायरिंग सबसे पहले किधर से हुई?, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज बीएस चौहान की अगुआई में बनी इस टीम में एसके अग्रवाल (हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज) और एके गुप्ता (पूर्व डीजीपी) शामिल हैं।
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इटावा में जांच करती न्यायिक आयोग की टीम
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे यह टीम वन विभाग के अतिथि गृह सुमेर सिंह किला पहुंची। जहां टीम ने जिलाधिकारी जेबी सिंह, एसएसपी आकाश तोमर समेत पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रवीण दुबे उर्फ बऊआ से जुड़ीं जानकारियां हासिल कर एनकाउंटर से संबंधित दस्तावेज लिए। इसके बाद टीम इटावा के कचौरा घाट पहुंची जहां नौ जुलाई को एसओजी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने एनकाउंटर में प्रवीण दुबे उर्फ बऊआ को मार गिराया था।
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इटावा में न्यायिक आयोग की टीम
- फोटो : अमर उजाला
न्यायिक आयोग की टीम ने मुठभेड़ स्थल का जायजा लेने के बाद एनकाउंटर में शामिल रहे एसओजी प्रभारी सत्येंद्र सिंह और सिविल लाइन प्रभारी जितेंद्र सिंह व उनकी टीम से पूछताछ की। टीम ने एनकाउंटर में शामिल पुलिस कर्मियों से पूछा कि उनको बदमाशों के बारे में जानकारी कैसे मिली? उनकी घेराबंदी कैसे की गई? मुठभेड़ में मारा गया बदमाश किस हथियार से फायर कर रहा था?, उसके साथ कितने साथी थे? किसके साथ स्कॉर्पियो की लूट की थी? गाड़ी किस पेड़ से टकराई थी? ऐसे कई सवाल पुलिस कर्मियों से किए।
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इटावा में जांच करती न्यायिक आयोग की टीम
- फोटो : अमर उजाला
कुछ सवालों के जवाब पुलिस कर्मियों ने दे दिए तो कुछ नही दे सके। इसके बाद न्यायिक आयोग की टीम करीब तीन बजे इटावा से उज्जैन के लिए रवाना हो गई। जहां दहशतगर्द विकास दुबे ने आत्मसमर्पण किया था। इस दौरान एसपी ग्रामीण ओमवीर सिंह, एसपी सिटी डॉ. रामयश सिंह, एसपी क्राइम ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद समेत जिले से सभी सर्किल आफिसर मौजूद रहे।
बिकरू कांड की जांच कर रही एसआईटी पहुंची इटावा
- फोटो : अमर उजाला
एनकाउंटर स्थल पर 100 मीटर का बनाया घेरा
न्यायिक आयोग की टीम पहुंचने से पहले पुलिस ने एनकाउंटर स्थल के 100 मीटर के दायरे में घेरा बना दिया था, जिससे की कोई उनके पास नहीं जा सके। इस दौरान पुलिस कर्मियों ने मीडिया कर्मियों व स्थानीय लोगों को दूर ही रखा।