दहशतगर्द विकास दुबे के साथ गुड्डन त्रिवेदी साए की तरह रहता था। दोनों की जोड़ी इलाके में दहशत फैलाने के लिए जानी जाती है। गुड्डन के खिलाफ कोई रिपोर्ट लिखाने को तैयार नहीं होता था। हत्या के एक मामले में वो बरी हो गया था और मारपीट के एक मामले में फाइनल रिपोर्ट लग गई थी। वो अपराध में शामिल होता रहा लेकिन लिखापढ़ी में नहीं।
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kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
नेताओं का संरक्षण मिला और पुलिस का साथ। गुड्डन बसपा और सपा से जुड़ा रहा। भाजपा में भी उसकी अच्छी पकड़ रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गुड्डन आपराधिक मामलों में सामने नहीं रहता था। पर्दे के पीछे रहकर वारदातें अपने इशारों पर कराता था। गुड्डन लाइसेंसी रायफल, पिस्टल के अलावा कई और असलहे रखता है। असलहों के साथ उसकी कई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। लंबी कदकाठी, लंबी मूंछें और कंधे पर रायफल। भेष बिल्कुल डकैतों की तरह बना रखा था।
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- फोटो : amar ujala
कानपुर देहात के रूरा थाना क्षेत्र के कुढ़वा गांव से गुड्डन की पत्नी कंचन ग्राम प्रधान है। जबकि पूरा परिवार रूरा बाजार में रहता है। जिला पंचायत सदस्य होने की वजह से नेताओं से अच्छे संबंध हैं। बिकरू गांव में हुए एनकाउंटर में जिला पंचायत सदस्य गुड्डन त्रिवेदी की बड़ी भूमिका थी। उसी ने असलहों का जखीरा जुटाया था। पुलिसकर्मियों पर गोलियां भी बरसाईं। वो दर्जा प्राप्त मंत्री संतोष शुक्ला की हत्या में भी शामिल था। पर बाद में बरी हो गया था।
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- फोटो : अमर उजाला
ये जानकारी पुख्ता सूत्रों से मिली है। कानपुर पुलिस का कहना है कि गुड्डन विकास के गैंग का साथी है। इसलिए उसको वांछित किया गया था। पूछताछ कर साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वो कम से कम तीन चार असलहे हमेशा अपने साथ लेकर चलता था। अधिकतर वो बिकरू में विकास के घर पर ही रहता था। वारदात की रात वो विकास के साथ था। विकास के कहने पर अपने लाइसेंसी शस्त्र के अलावा अपने गुर्गों से भी असलहा, कारतूस और देसी बम मंगवाए।
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जारी किया था पोस्टर
बिकरू गांव एनकाउंटर के मामले में पुलिस ने 21 नामजद और 70 अज्ञात बदमाशों पर केस दर्ज किया था। इसमें गुड्डन का नाम नहीं था। बाद में पुलिस ने जांच की और 15 आरोपियों को चिन्हित कर एक पोस्टर जारी किया। जिसमें वो था। पुलिस जांच में वारदात में उसके शामिल होने के साक्ष्य मिले थे, उसी आधार पर उसको वांछित किया गया था।
दबाव बनाकर खत्म कराया था केस
कुछ समय पहले रूरा थाने में गुड्डन के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट, धमकी देने और बलवा समेत अन्य कई धाराओं में केस दर्ज हुआ था। जांच के बाद मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। पुलिस से अच्छी बनती थी और वादी को डराया धमकाया गया। जिस आधार पर केस बंद हुआ।