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ग्राउंड रिपोर्ट: खौफ का दूसरा नाम है विकास दुबे, ग्रामीण बोले जो पुलिस को मार सकता है वो कुछ भी कर सकता है

Sun, 05 Jul 2020 05:28 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
विकास दुबे की दहशत का आलम ये है कि बिकरू में कोई उसका नाम लेने से भी घबराता है। यहां खौफ का दूसरा नाम विकास दुबे है। गांव में गुरुवार को हुई मुठभेड़ के बाद ग्रामीणों में दहशत है। हर कोई खामोश है। गांव की हर गली हर कोने पर पुलिस का पहरा है। गांव की सीमाओं पर आरएएफ तैनात है।

 
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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
कुछ ऐसा ही हुआ जब पुलिस की टीम ने गांव के कुछ लोगों से विकास के बारे में पूछा। एक गांव वाले ने कहा साहब...! हम गरीब लोग हैं। हमें माफ करो। मुझे कुछ नहीं कहना। अगर खिलाफत में मुंह खोला और वो जिंदा बच गया तो हम लोगों को मार डालेगा..।  ग्रामीण बोले हम उसके बारे में कुछ नहीं बता सकते। जो पुलिस को मार सकता है, वो कुछ भी कर सकता है।



 
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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
डर और दहशत भरे ये शब्द बिकरू गांव के एक शख्स के हैं। विकास की आतंक कुछ इस कदर है कि गांव वाले उससे खौफ खाते हैं। उसके खिलाफ एक भी शब्द बोलने से डरते हैं। यही वजह है कि जब ग्रामीणों से बातचीत करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बात करने से इंकार कर दिया।

 

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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
उनका कहना था कि वह मेहनत मजदूरी करके परिवार पालते हैं। विकास से उनका कोई लेना देना नहीं है। इससे एक बात तो स्पष्ट हो गई कि दहशतगर्त का ग्रामीणों की जुबानों पर भी लगाम है। थाने में भाजपा नेता समेत पांच हत्या के केस विकास पर दर्ज हुए। इसके अलावा लूट, डकैती, हत्या केप्रयास समेत कुल 60 से अधिक केस हैं।

 
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गांव में आरएएफ का पहरा - फोटो : amar ujala
फिर भी उसके रुतबे में कोई कमी नहीं आई। जरायम की दुनिया में कदम रखने के बाद ही उसने अपना सम्राज्य खड़ा किया। करोड़ों का घर बनाया, गाड़ियां खरींदी और अरबोंकी संपत्ति बनाई। ऐसे में ग्रामीण इसलिए डरते हैं कि इतनी आपराधिक वारदातों में संलिप्त होने के बावजूद भी उसका कुछ नहीं हुआ तो आगे भी कुछ नहीं होगा।

 
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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
काफी प्रयास करने के बाद गांव के एक शख्स ने तीन चार बातें कहीं। उसने कहा कि पुलिस बड़े लोगों की तरफ ही रहती है। विकास का पुलिस के साथ उठना बैठना रहता है। आज भी उनका कहना है कि पुलिस तीन चार दिन गांव में रहेगी, उसके बाद चली जाएगी। आगे की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन देगा। इसलिए ये लोग मुंह नहीं खोल रहे हैं। कुल मिलाकर विकास की दहशत इतनी है कि लोगों को पुलिस पर भरोसा नहीं है।
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