विगत 24 दिनों में रेलवे ट्रैक पर हुई सिलसिलेवार घटनाओं के कहीं आपस में तार तो नहीं जुडे़ हैं। इसको खंगालने के लिए एटीएस ने डेरा डाल लिया है। एटीएस के सीओ ने जिले में हुई घटना के बारे में जानकारी जुटाई। मंगलवार को एटीएस के सीओ बृजेश कुमार पुलिस लाइन स्थित एसओजी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने एसओजी व सर्विलांस प्रभारी से फर्रुखाबाद रेलवे ट्रैक पर हुई घटना के बारे में जानकारी ली। तीनों घटनाओं में समानता एक है कि अंधेरे में अंजाम दी गई।
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Kalindi Express Accident
- फोटो : अमर उजाला
पहली घटना 16 अगस्त रात 02:35 बजे झांसी ट्रैक पर साबरमती डिरेल होने पर हुई। दूसरी घटना में 26 अगस्त रात 12:05 बजे जिले के भटासा स्टेशन के पास स्पेशल पैंसेंजर ट्रेन के आगे लकड़ी का लट्ठा रखा गया। तीसरी घटना आठ सितंबर को रात 8.30 बजे बर्राजपुर के आगे मुडेरी गांव में कालिंद्री एक्सप्रेस के आगे एलपीजी सिलिंडर रखकर की गई।
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केंद्रीय खुफिया एजेंसियां जोड़ रहीं रेल पर हमले की घटनाओं के तार
उधर, कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस को बेपटरी करके हजारों लोगों की जान खतरे में डालने की साजिश रचने के आरोपियों की तलाश केंद्रीय जांच एजेंसियों ने तेज कर दी है। शुरुआती जांच में एटीएस और कानपुर पुलिस कमिश्नरेट को कोई अहम सुराग नहीं मिलने पर केंद्रीय एजेंसियां बीते दिनों देश भर में हुई ऐसी घटनाओं की कड़ियों को जोड़ रही हैं। एजेंसियों को शक है कि इन घटनाओं को अंजाम देने का मकसद देश में अस्थिरता पैदा करना है।
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उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो कानपुर और उसके आसपास बीते दिनों हुईं ऐसी तीन घटनाओं के बाद केंद्रीय एजेंसियों ने इसके लिए अन्य राज्यों से भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इससे सभी घटनाओं का आपस में कोई लिंक होने और किसी आतंकी संगठन की भूमिका होेने का पता लगाया जा रहा है। वहीं पूर्व में वर्षों में इस तरह की घटनाओं के आरोपियों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि उनसे ही कोई अहम सुराग मिल सके।
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कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट को गृह मंत्रालय ने गंभीरता से लेते हुए पूरे घटनाक्रम की पड़ताल का जिम्मा एनआईए को दिया है। साथ ही, आईबी के अधिकारी कानपुर और आसपास के जिलों में आतंकी संगठनों के स्लीपिंग माड्यूल्स को चिन्हित कर उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
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गृह मंत्रालय ने रेलवे को भी ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सभी एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करने को कहा गया है। केंद्रीय एजेंसियों के साथ पुलिस और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी लगातार समन्वय बनाए हुए हैं।
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गहराता जा रहा शक
बता दें कि बीते माह कानपुर में साबरमती एक्सप्रेस और फर्रुखाबाद के कायमगंज में पैसेंजर ट्रेन को बेपटरी करने की कोशिश भी हुई थी। कानपुर की घटना में एटीएस को कोई अहम सुराग नहीं मिला तो कायमगंज में दो शराबी युवकों को पकड़ा गया था। अब इन दोनों घटनाओं में मिले सुरागों को दोबारा खंगाला जा रहा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं पुलिस ने आनन-फानन तो इनका खुलासा नहीं किया था।
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डीप स्टेट गिरोह पर भी सुरक्षा एजेंसियों की निगाह
सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां शहर और आसपास के इलाके में तेजी से पनप रहे डीप स्टेट गैंग पर भी निगाह गढ़ा दी हैं। इस गैंग के लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर न सिर्फ जुड़ रहे हैं, बल्कि कोडिंग में एक दूसरे को संदेश देने का काम भी कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो इस गैंग की बातें हर कोई नहीं समझ पाता है। इसे समझाने के लिए गैंग के शातिर एक-दूसरे के पास जाते हैं।
क्या है डीप स्टेट गैंग
डीप स्टेट शब्द का प्रयोग ऐसे वर्ग के लिए किया जाता है, जो समानांतर सरकार चलाने या सरकार को बदनाम करने के लिए साजिश रचते हैं। माना जा रहा है कि पिछले दिनों बांग्लादेश में हुए तख्ता पलट के पीछे इसी गिरोह का हाथ रहा है। डीप स्टेट का जुड़ाव विशेषकर अमेरिका, चीन जैसे मजबूत देशों से है, जो अपने हितों के लिए दूसरे देशों में अस्थिरता पैदा करते हैं। डीप स्टेट गैंग स्थानीय लोगों को ही बरगला कर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिलवाते हैं। एजेंसियों का मानना है कि यह काम आतंकियों का नहीं हो सकता क्योंकि जो तैयारी अब तक समझ में आई है, वह बेहद कमजोर है।