जसविंदर सिंह
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इसके बाद बारी-बारी से कभी शौकत अपनी बातों को कहतीं तो कभी कैफी अपने जज्बात बयां करते। दोनों की पहली मुलाकात, घरवालों की पाबंदी के बाद चिट्ठियों का दौर, कैफी का खून से खत लिखना, शौकत के पिता का उनको कैफी से मिलवाने मुंबई ले जाना, उनका एक दिन बिना घरवालों को बताए निकाह पढ़वाना, कामरेड के मोेर्चे में शामिल होना जैसे कई किस्सों को कहानी बनाकर दर्शकों तक पहुंचाया। कैसे फिल्मों के लिए गीत लिखने की शुरूआत, पहला गीत वक्त ने किया क्या हंसी सितम...लिखने के बावजूद उनको फिल्मों के लिए अनलकी मानना, फिर उनका फिल्मों में आना, गांव के विकास करने की कहानी को बेहद सादगी से शहरियों तक पहुंचाया। प्ले खत्म होने पर शौकत बनी शबाना की आंखों में आंसू थे। मंच संचालिका के न कहने के बावजूद हॉल में बैठे सभी दर्शक तालियां बजाते हुए कुर्सियों से उठ खड़े हुए।